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Firozabad News: राम का बाण लगते ही रावण का पुतला धूं-धूंकर जल उठा

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फोटो 28 रामलीला मैदान में रावण के पुतला दहन के दौरान आकर्षक आंतिशवाजी का नजारा। संवाद
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टूंडला। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की ओर से रावण की नाभि में तीर मारने के साथ ही रावण कटे वृक्ष की तरह धाराशाई होकर गिर पड़ा। इसी के साथ ही बुराई के प्रतीक रावण का पुतला धूं-धूंकर जल उठा। मध्य रात्रि बाद हुए रावण दहन को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग रामलीला मैदान में डटे रहे।
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दशहरा के पावन पर्व पर श्रीनगर रामलीला महोत्सव व रेलवे रामलीला महोत्सव में रावण वध की लीलाएं खेलीं गयीं। इसमें सबसे पहले रावण के पुत्र नारायणतक राम-लक्ष्मण के साथ युद्ध करने पहुंचता है, परंतु वह ज्यादा देर तक रामकी सेना के आगे युद्ध के मैदान में टिक नहीं पाया और वह वहींं, युद्ध भूमि में धरासायी हो गया। इसके बाद अहिरावण युद्ध के लिए युद्ध मैदान में पहुंच गया। अहिरावण ने राम व लक्ष्मण दोनों को काफी छकाया। वह एक अहिरावण का वध करते उसके रक्त से दूसरा अहिरावण पैदा हो जाता था। बाद में विभीषण द्वारा अवगत कराने पर राम ने उसके रक्त को जमींन पर ही नहीं गिरने दिया। तब कहीं जाकर उसका वध हुआ।

इसके बाद अहंकारी रावण अट्टहास करता स्वयं ही युद्ध के मैदान में पहुंच गया। युद्ध में रावण की ओर से अनेकों मायावी शक्तियों का प्रयोग किया। युद्ध के दौरान रावण का एक सिर कटता उसके स्थान पर दूसरा शीश निकल आता था। विभीषण ने रावण को हारता न देख राम को युद्ध मैदान में पहुंचकर अवगत कराया कि रावण की नाभि में अमृत है। इस बात की जानकारी मिलने पर श्रीराम ने सीधा अग्रिवाण रावण की नाभि में मारा उसके साथ ही रावण धराशाई होकर गिर पड़ा। बाद में श्रीराम की ओर से लक्ष्मण को रावण के पास राजनीति की सीख लेने भेजा गया। रामलीला देखने को आसपास के गांवों सहित हजारों की संख्या में लोगों ने पहुंचकर रामलीला व रावण दहन का आनंद लिया।
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