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Firozabad News: गेल इंडिया की 10% गैस कटौती से कांच इकाइयां निराश, उत्पादन पर गहराएगा संकट

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फिरोजाबाद। ईरान-इजराइल युद्ध के कारण फिरोजाबाद का कांच चूड़ी उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। गेल इंडिया ने कांच इकाइयों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में दस फीसदी की कटौती करने का संदेश भेजा है। इस कटौती से पहले से ही मंदी झेल रहे उद्योग में हताशा बढ़ गई है।
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युद्ध के चलते ईरान से होने वाली सीधी गैस आपूर्ति पर संकट गहरा गया है। इसके मद्देनजर गेल इंडिया ने कांच एवं चूड़ी इकाइयों को मिलने वाली गैस आपूर्ति में यह कटौती की है। उद्यमियों को इस आशय के ई-मेल और व्हाट्सएप संदेश मिलने शुरू हो गए हैं। इस घोषणा के बाद लगभग 2500 करोड़ रुपये वार्षिक कारोबार वाले कांच उद्योग से जुड़े उद्यमियों की चिंता बढ़ गई है। कारोबारियों का मानना है कि निर्धारित कोटा में कटौती के बाद आरएलएनजी (रिगैसीफाइड, लिक्विड नेचुरल गैस) की कीमतें बढ़ना तय है। इससे कांच के आइटमों की उत्पादन लागत बढ़ जाएगी। बढ़ी हुई लागत के साथ विदेशी निर्यात बाजारों में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल होगा। साथ ही, घरेलू बाजारों में भी कांच के आइटमों को बेचना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

उद्योग पर गहराता संकट
फिरोजाबाद का कांच चूड़ी उद्योग लंबे समय से मंदी की मार झेल रहा है। ईरान-इजराइल युद्ध ने इस उद्योग के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। गेल इंडिया द्वारा गैस आपूर्ति में दस फीसदी की कटौती ने उद्यमियों की परेशानी और बढ़ा दी है। यह कटौती सीधे ईरान से होने वाली गैस आपूर्ति पर संकट के कारण की गई है।
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लागत वृद्धि और बाजार चुनौतियां
गैस आपूर्ति में कटौती से आरएलएनजी की कीमतें बढ़ने की आशंका है। इससे कांच के उत्पादों की उत्पादन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। बढ़ी हुई लागत के कारण भारतीय कांच उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता खो सकते हैं। घरेलू बाजार में भी उपभोक्ताओं के लिए ये उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिससे बिक्री पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
कांच इकाइयों में होने वाली गैस सप्लाई का गणित-
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मिल रही सस्ती दर की एपीएम गैस
11 लाख घनी मीटर प्रतिदिन, अतिरिक्त सप्लाई के रूप में मिलने वाली आरएलएनजी का कोटा
तीन लाख घनमीटर
रियायती दर वाली एपीएम और कॉमर्सियल श्रेणी की आरएलएनजी श्रेणी के अतिरिक्त खर्च होने वाली स्पॉट आरएलएनजी गैस का कोटा 1.5 लाख घनमीटर
नोट- फिरोजाबाद की कांच इकाईयों को उपरोक्त सभी तीन श्रेणी की गैस आपूर्ति के हिसाब से औसत तय कर गैस बिल का भुगतान करना होता है।

टीटीजेड की इकाईयों को गैस आपूर्ति में कटौती चिंता का विषय-
1995 में जारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार फिरोजाबाद की कांच इकाईयों को प्राथमिकता के आधार पर सस्ती दर की एपीएम गैस सप्लाई दी जा रही है।वहीं टीटीजेड में संचालित इकाईयों में गैस के अलावा अन्य ईधन का प्रयोग वर्जित है। ऐसे में गैस कटौती के संदेश कांच उद्योग के लिए चिंता का विषय है।
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उद्यमियों की बात-
टीटीजेड में गैस के अतिरिक्त अन्य ईधन पर रोक है। नेचुरल गैस कोटा में कटौती हताशा भरी है। प्राथमिकता क्षेत्र की इंडस्ट्रीज में आरएलएनजी गैस कोटा परेशानी का कारण बनेगी।
मुकेश बंसल टोनी वरिष्ठ निर्यातक
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आरएलएनजी कोटा में कटौती के बाद गैस के दाम बढ़ना तय है।सीधे ईरान से आने वाली गैस अब चीन के रास्ते देश में आएगी।नए हालतों में इंडस्ट्रीज चलाना दुश्कर होगा।
बिन्नी मित्तल अध्यक्ष द इंडस्ट्रीरियल कॉपरेटिव सोसायटी

अधिकारी की बात-
निदेशालय स्तर से सीधे कांच इंडस्ट्रीज को आरएलएनजी कोटा में दस प्रतिशत की कटौती की जानकारी मिलीं हैं। आरएलएनजी में दस प्रतिशत कटौती के बाद कांच इकाईयों को अब तीन लाख घनमीटर की जगह 2.7 लाख घनमीटर गैस दी जाएगी।
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मनमोहन स्थानीय प्रबंधक गेल गैस
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