फिरोजाबाद। कांच नगरी में विकास की रफ्तार के साथ उड़ रही धूल स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 की रैंकिंग में रोड़ा बन सकती है। नगर निगम और अन्य कार्यदायी संस्थाओं की ओर से एनजीटी के नियमों को ताक पर रखकर कराए जा रहे निर्माण कार्यों से न केवल हवा की गुणवत्ता खराब हो रही है, बल्कि सर्वेक्षण के बहुमूल्य अंकों में कटौती का खतरा भी पैदा हो गया है।
शहर में करोड़ों की लागत से सड़क नवीनीकरण और बहुउद्देश्यीय भवनों का निर्माण चल रहा है। नालबंदान-रसूलपुर मार्ग, सेंट्रल बैंक से वीनस ऑटो और आसफाबाद चौराहा तक सड़क कार्य प्रगति पर है। वहीं, जलकल परिसर में अर्बन प्लाजा, वर्किंग वुमेन हॉस्टल और सुहागनगर में निर्माणाधीन ओवरब्रिज (सेतु) के पास धूल के कणों पर अंकुश लगाने के लिए कोई उपाय नहीं किए गए हैं। मिट्टी और मौरंग के जखीरे खुले में पड़े हैं, जो वाहनों के टायरों से चिपककर हवा में जहर घोल रहे हैं।
एनजीटी के इन नियमों की हो रही अनदेखी
ग्रीन नेट का अभाव: निर्माण स्थल को हरे कपड़े या टिन शेड से कवर नहीं किया गया है।
छिड़काव नहीं: उड़ती धूल को दबाने के लिए नियमित पानी का छिड़काव नहीं हो रहा।
खुली डंपिंग: निर्माण अपशिष्टों को ढकने के बजाय खुले में छोड़ा जा रहा है।
जाम की समस्या से भी रैंकिंग होगी खराब
स्वच्छता सर्वेक्षण के मानकों के अनुसार, शहर के चौराहों का साफ-सुथरा और जाम मुक्त होना अनिवार्य है। इसके विपरीत, जैन मंदिर चौराहा, गांधी पार्क, सुहागनगर और क्लब चौराहा घंटों जाम की समस्या से कराह रहे हैं। वाहनों के रेंगने से निकलने वाला धुआं और प्रदूषण रेटिंग में गिरावट का मुख्य कारण बनेगा।
निर्माण कार्यस्थलों पर धूल पर अंकुश लगाने के लिए बनी कार्ययोजना का अनुपालन हर हाल में कराया जाएगा। अपर और सहायक आयुक्त को पर्यवेक्षण के निर्देश दिए गए हैं। एनजीटी नियमों की अनदेखी करने वाले ठेकेदारों को नोटिस जारी कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- प्रशांत नागर, नगर आयुक्त
प्रमुख निर्माण स्थल, जहां स्थिति गंभीर
सुहागनगर ओवरब्रिज निर्माण स्थल
अर्बन प्लाजा (जलकल परिसर)
रसूलपुर-आसफाबाद मार्ग नवीनीकरण
वर्किंग वुमेन हॉस्टल निर्माण