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चूड़ी कारखानों में अस्थाई शटडाउन की आशंका

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रफ़रोजाबाद ! औद्योगिक क्षेत्र स्थित कारखाने में काम करते श्रमिक - फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। एक माह के भीतर गैस के दामों में लगभग 15 रुपये, सोडा-एस और केमिकल के दामों में बढ़ोत्तरी से कारखानेदार परेशान हैं। मंदी से जूझ रहे कारखानेदार सादा चूड़ी के दाम बढ़ाने में असमर्थ हैं। ताजा हालतों में एक-दो दिन में कई चूड़ी कारखानों में अस्थाई शटडाउन के हालात खड़े हो जाएंगे।
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विगत माह अगस्त से 30 सितंबर तक कारखानों में फुंकने वाली गैस के दामों में 8.82 रुपये की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। अब तेल व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अक्तूबर में गैस के दामों में लगभग सात रुपये की अपरिहार्य वृद्धि की घोषणा की है। ऐसे में अगस्त से अब तक गैस के दामों 15 रुपये प्रति घनमीटर की वृद्धि हो चुकी है।
इधर, राजस्थान से आयातित और कांच तैयार कराने में प्रयुक्त मुख्य घटक सोडा-एस के दाम भी एक माह में 2400 प्रति क्विंटल से बढ़कर 2800 रुपये पर पहुंच चुके हैं। वहीं कांच चूड़ी तैयार करने में प्रयुक्त अन्य केमिकल के दामों में भी 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। प्राकृति गैस, सोडा और केमिकल के दामों में उछाल के कारण शहर के परंपरागत चूडी उद्योग जगत में खलबली है। मंदी के कारण माल का उठान नहीं होने स्थिति में कारखानेदार सादा चूड़ी के दामों में बढ़ोत्तरी नहीं कर पा रहे हैं।
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कई कारखानों में अस्थाई शटडाउन जैसी हालात
दो साल की लंबी अवधि में मंदी की मार से जूझ रहे चूड़ी उद्योग जगत पर गैस, केमिकल के दामों में वृद्धि भारी पड़ रही है। गोदाम स्वामी और सादा चूड़ी के क्रेता वर्तमान चूड़ी दरों में बढ़ोत्तरी को स्वीकार करने में असमर्थता जता चुके हैं। इन हालातों में कई चूड़ी कारखानों में अस्थाई शटडाउन की आशंका है।
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बिगड़ सकते हैं हालात
जिले में चूड़ी उत्पादक कारखानों की संख्या करीब 90-100 है। इनमें शटडाउन हुआ तो परंपरागत चूड़ी उद्योग के माध्यम से आजीविका कमाने वाले लगभग चार लाख कामगारों, श्रमिकों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। जुड़ाई, झलाई, चूड़ी डेकोरेशन, छपाई, सदाई श्रमिकों के अलावा पल्लेदार, पकाई श्रमिक चूड़ी उद्योग के माध्यम से ही अपनी आजीविका चलाते हैं।
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कारखानेदारों की बात-
गैस, केमिकल और अन्य कच्चे माल के दाम बढ़ने से प्रति तोड़ा चूड़ी की लागत में 25-30 रुपये की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। त्योहार पर भी मंदी है। चूड़ी के दाम संशोधित नहीं हो पा रहे हैं। हालातों पर मंथन करने के लिए शनिवार को सिंडिकेट की बैठक बुलाई गई थी। इस सप्ताह हालात नहीं सुधरे तो कई कारखानों में शटडाउन तय है।
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हनुमान प्रसाद गर्ग चेयरमैन द ग्लास सिंडिकेट
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