जिले में जुलाई के पहले सप्ताह से आंखों की बीमारी पैर पसारने लगी। देखते ही देखते आई फ्लू का प्रकोप तेजी से बढ़ गया। मेडिकल कॉलेज में अक्सर 100 से 120 की ओपीडी हो रही थी। दो दिन पूर्व भी यह ओपीडी अधिकतम 220 थी। मंगलवार को नेत्र रोग ओपीडी में 290 मरीज पहुंचे। इसमें 220 मरीज सिर्फ आई फ्लू के थे।
देहात क्षेत्रों की अधिकांश सीएचसी पर नेत्र रोग विशेषज्ञों की कुर्सी खाली है। ऐसे में लोग निजी चिकित्सकों के पास जा रहे हैं। या फिर सीधे ही मेडिकल स्टोर से मरीज दवा ले रहे हैं। स्वास्थ्य विगाग की टीमें भी क्षेत्रों में जाकर मरीजों को दवाएं वितरित कर रही हैं। औषधि निरीक्षक देशबंधु ने बताया कि मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण कर जानकारी जुटाई जा रही है कि कहीं महंगे दाम में आई ड्रॉप तो नहीं बिक रहा है। आंख के दवाओं की गुणवत्ता परखी जाएगी। ओवररेट दवाएं बेचने पर कार्रवाई की जाएगी।
यह दिखते हैं लक्षण
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेरणा उपाध्याय ने बताया कि आईफ्लू के मरीजों की आंखों में लालिमा, पलकों में सूजन और खुजली हो सकती है। पीला या पानी जैसा स्राव हो सकता है। पलकें चिपचिपी हो सकती हैं। बच्चों को बुखार हो सकता है। बचाव के लिए आंखों को साफ करने के लिए आई वाइप्स का इस्तेमाल करें। अपनी आंखें न मलें, सुरक्षात्मक व गहरे रंग के चश्मे का प्रयोग करें। कांटेक्ट लेंस के उपयोग से बचें। घरेलू उपचार या स्व-नुस्खे का उपयोग करने से बचें। अपनी आंखों में किसी भी ड्रॉप का उपयोग करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लें।