फिरोजाबाद। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन स्कूल संचालकों की मनमानी सामने आ रही है। प्रतिबंध के अंतर्गत स्कूल संचालकों ने मान्यता प्राप्त कर ली, लेकिन 16 से 24 वर्ष बीत जाने के बाद भी मानक पूरे नहीं कर सके हैं। शासन से जब फाइल खुली तो जवाब देने के लिए नोटिस जारी किए गए। महज दो विद्यालयों ने ही नोटिस का जवाब दिया है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कुछ स्कूलों को 1994 में मान्यता दी थी, लेकिन निरीक्षण करने पर पता चला कि कई मानक अभी भी अधूरे हैं। इनको छह माह से लेकर एक वर्ष में पूरा करना था। इसके बाद भी न तो किसी अधिकारी ने इस तरफ ध्यान दिया और न ही कॉलेज संचालकों ने मानक पूरे किए। जब शासन में फाइल खुली तो स्कूल संचालकों के होश उड़ गए।
उसमें जनपद के दस विद्यालयों के नाम भी आए। इन विद्यालयों को 15 दिन में जवाब देने के लिए कहा था। अन्यथा मान्यता खत्म करने के आदेश जेडी (ज्वाइंट डायरेक्टर) ने दिए थे। डीआईओएस की ओर से जनवरी माह में इन विद्यालय संचालकों को नोटिस जारी किया था। इनमें सिर्फ दो विद्यालय संचालकों ने ही नोटिस का जवाब देना जरूरी समझा।
ये मानक मिले अधूरे
विद्यालयों भवनों में कमरों की संख्या मानक से कम है। शिक्षण सामग्री पर्याप्त संख्या में नहीं है। विद्यालय के नाम भूमि होने का बैनामा नहीं उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा अन्य कमियां भी हैं। मान्यता की शर्तों को पूरा न करने वालों में एडेड विद्यालय भी हैं।
इन विद्यालयों को जारी हुआ था नोटिस
वीरांगना अवंतीबाई उमावि नगला खंडारी, संत शिवानंद जीएल उमावि अलीनगर कैंजरा, एमएम यश उमावि जसराना, जनशक्ति उमावि रुधैनी सराय, श्रीमति धूपश्री हायर सेकेंड्री स्कूल आसफाबाद, अहिल्याबाई कन्या विद्यालय मक्खनपुर सहित 10 विद्यालयों को नोटिस जारी किया।
- मान्यता के बाद मानक पूरे न करने पर नोटिस जारी किया गया था। सभी ने नोटिस का जवाब नहीं दिया। हम स्वयं निरीक्षण करने के लिए स्कूल में जाएंगे। मानक पूरे न मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। - बालमुकुंद प्रसाद, डीआईओएस।