फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कमीशनखोरी के चलते महंगा हुआ ‘बस्ता’

Wed, 06 Apr 2016 10:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो फीरोजाबाद
विज्ञापन
कमीशनखोरी के चलते महंगा हुआ ‘बस्ता’ - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
सरकार सभी को शिक्षा का अधिकार कानून के तहत शिक्षित बनाना चाहती है, लेकिन निजी स्कूल संचालकों की मनमानी बच्चों को शिक्षा से दूर करने में लगी है। महंगाई बढ़े या न बढ़े, स्कूलों की फीस और पाठ्यपुस्तक जरूर महंगे हो जाते हैं। कापी-किताबों की कीमतों में हो रहे इजाफे के चलते अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। स्कूल संचालकों ने कमाई के चक्कर में किताब, नोटबुक और यूनिफार्म पर कमीशनखोरी शुरू कर दी है।
विज्ञापन


नया शिक्षा सत्र अभिभावकों के लिए काफी खर्चीला होगा। स्कूलों ने फीस बढ़ाने के साथ कोर्स की रेट भी बढ़ा दी हैं। कमीशन के चलते एनसीईआरटी की पुस्तकें कोर्स से गायब कर दीं गई। हालत यह है कि किताबों की खरीद के लिए सूची की जगह दुकान का नाम बताया जा रहा है। पिछले वर्ष शासन ने आदेश देकर स्कूलों में किताब-कापी की बिक्री पर पाबंदी लगा दी थी, लेकिन स्कूल संचालकों ने दुकानदार को सेट कर वहां से खरीदारी शुरू करा दी। इन दुकानों पर मनमानी कीमत वसूली जा रही हैं। पुस्तक विक्रेता सौरभ ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष किताबों की कीमत में दस से पंद्रह फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

प्रशासन नहीं कर रहा सुनवाई
ऐसा नहीं है कि स्कूल संचालकों की मनमानी से प्रशासनिक अधिकारी अवगत नहीं। उनके बच्चे खुद इन्हीं स्कूलों में पढ़ते हैं, उन्हें भी महंगी किताबें खरीदनी होती है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करता। जबकि अभिभावक कई बार शिकायत भी करते हैं।
विज्ञापन


फीस कुछ और तो रसीद कुछ और
स्कूलों में जितनी फीस वसूली जाती है, उतने की रसीद नहीं दी जाती। टैक्स चोरी करने के लिए सादा रसीद पर खर्चा लिख दिया जाता है।
पाठ्य सामग्री हुई महंगी
स्कूल बैग- 100 से 800 रुपये
कापी- 20 से 60 रुपये तक
कलर- 10 से 100 रुपये
ज्योमैट्री बाक्स- 10 से 100 रुपये
थर्मस- 100 से 300 रुपये
टिफिन- 50 से 200 रुपये
------बाक्स----
इंग्लिश मीडियम स्कूलों में ये है कोर्स की दरें
क्लास            रुपये
केजी से नर्सरी           1800 से 2200 रुपये तक
क्लास एक और दो       2600 से 3200 रुपये तक
क्लास तीन और चार       3500 से 4200 रुपये तक
पांच और छह               4500 से 5500 रुपये तक
सात से आठ           6000 से 8200 रुपये तक    
 
इन सुविधाओं का हवाला देकर वसूलते हैं पैसे
- मैसेज अलर्ट के नाम पर 1200 रुपये प्रतिवर्ष।
- री-एडमिशन के नाम से पांच से 10 हजार रुपये शुल्क।
- जनरेटर की सुविधा के नाम पर अलग से फीस वसूली।  

बोले अभिभावक बिगड़ गया बजट
बच्चों की पढ़ाई के कारण बजट को पहले से मैंटेन करना पड़ता है। सैलरी में कटौती होती है, ऐसे में अप्रैल माह के अन्य खर्चों को रोककर फीस पर ध्यान देते हैं।
मोनिका, अभिभावक व शिक्षिका

स्कूल संचालक तो खुद ही मनमानी करते हैं। बच्चों को पढ़ाना है तो खर्च उठाना पड़ेगा। 35 हजार रुपया में दो हजार रुपये तो टैक्स के कटे हैं। जबकि स्कूल में फीस 35 हजार रुपयेे जमा कर ली। बजट बिगड़ने के कारण बीमा पॉलिसी जमा नहीं कर पाए। राशन का खर्चा गड़बड़ाया। दो महीने बाद व्यवस्था पटरी पर आएगी।
 मधु भारद्वाज, अभिभावक व शिक्षिका

क्या कहते हैं अधिकारी
स्कूलों की कमीशनखोरी के प्रकरण में कोई शिकायत तो नहीं मिली है। अगर अवैध वसूली होती है तो अभिभावक शिक्षा विभाग को शिकायत दें। स्कूल के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।
विज्ञापन

रविंद्र सिंह, डीआईओएस फीरोजाबाद।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें