सौ शैया अस्पताल में आयोजित सीएमई में बोलते डा. एलके गुप्ता। संवाद।
फिरोजाबाद। विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस विषय पर मेडिकल कॉलेज में सीएमई का आयोजन किया गया। बालरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. एलके गुप्ता ने बताया कि वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे हर साल 21 मार्च को मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि डाउन सिंड्रोम एक आनुवांशिक विकार है, जो भ्रूण में अतिरिक्त क्रोमोसोम की मौजूदगी के कारण होता है। आमतौर पर इंसान में 46 क्रोमोसोम होते हैं, लेकिन डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों में 47 क्रोमोसोम होते हैं। यह अतिरिक्त क्रोमोसोम बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करता है।
उन्होंने डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों के दैनिक जीवन के कार्यों को बेहतर बनाने में ऑक्यूपेशनल थैरेपी की अहम भूमिका है। बच्चों को शुरुआती समय से ही ऑक्यूपेशनल थैरेपी की सुविधा दी जाए तो उनमें कार्य करने, समझने आदि की क्षमता काफी हद तक विकसित हो जाती है। इसके साथ ही डाउन सिंड्रोम के आनुवंशिक पहलुओं पर जानकारी दी। इस मौके पर डॉ अंकिता वर्मा, डॉ. अनामिका सचान आदि शामिल रहे।
लक्षणों को समझना जरूरी
- मानसिक विकास धीमा होना
- बोलने में कठिनाई
- सीखने की क्षमता में कमी
- चेहरे की विशेष संरचना (छोटी ठोड़ी, चपटी नाक)
- मांसपेशियों में कमजोरी
- हृदय से जुड़ी समस्याएं
पीड़ित बच्चों के लिए थैरेपी
स्पीच थैरेपी: इस थैरेपी से बच्चों की भाषा और संवाद क्षमता में सुधार किया जाता है। इससे वे अपनी भावनाओं और जरूरतों को व्यक्त कर पाते हैं।
ऑक्युपेशनल थैरेपी: इससे बच्चों को रोजमर्रा के काम करने में मदद मिलती है। जैसे-कपड़े पहनना, खाना खाना, ब्रश करना आदि।
फिजियोथैरेपी: मांसपेशियों की कमजोरी को दूर करने और बेहतर संतुलन बनाने के लिए फिजियोथेरेपी दी जाती है।