नया सत्र शुरू होने के बाद अब निजी स्कूलों में एडमीशन कराने की आपाधापी
मची हुई है। लाड़लों के भविष्य की खातिर अभिभावक बेतहाशा महंगाई की मार
झेलने को मजबूर हैं। अभिभावक निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें खरीदने में
जेब ढीली कर रहे हैं। कमीशन के खेल के चलते स्कूल में ही ड्रेस, कापी,
किताब दी जा रही हैं।
प्रदेश के सभी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2015-16 शुरू हो गया है। बडे़
से लेकर छोटे बैनर के स्कूलों में दाखिले की प्रक्रिया आखिरी दौर में हैं।
एडमीशन प्रक्रिया से लेकर पाठ्य पुस्तकों, ड्रेस आदि की खरीद में भी
अभिभावकों की जेब ढीली कराने में स्कूल संचालक पीछे नहीं है। दाखिला मिलते
ही स्कूल प्रशासन द्वारा किताबें, स्टेशनरी, ड्रेस की सूची थमाई जा रही है
या फिर मोटे दामों में खुद स्कूल बिक्री कर रहे हैं। पुस्तकों की सूची ओपन
ना होने की वजह से अभिभावक मजबूरी में महंगाई की मार झेल रहे हैं। वहीं, कई
निजी स्कूलों ने तो 10 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी है। यहां तक कि स्कूल आने
जाने का वाहन खर्चा तो 20 प्रतिशत तक बढ़ गया है।
एडमीशन प्रक्रिया को बनाया है धंधा
कई
स्कूलों में एडमीशन प्रक्रिया के नाम पर धंधा बनाया हुआ है। फार्म बेचकर
पहले टेस्ट लिया जाता है उस टेस्ट में फेल हुए स्टूडेंट्स को पुन: फार्म
फीस भरकर क्लास में शामिल कर लिया जाता है। वहीं, कई निजी स्कूल डोनेशन के
नाम पर उगाही करते हैं।
फीस कुछ और रसीद कुछ
कई स्कूलों से
अभिभावकों की शिकायतें हैं कि उनमें फीस कुछ और रसीद कुछ दी जाती है।
स्मार्ट क्लासेज, म्यूजिक क्लासेज, वार्षिकोत्सव की फीस वसूलते हैं। मगर
स्कूल संचालक रसीद नहीं देते हैं या देते हैं तो पक्की रसीद नहीं।
स्कूलों
में हर साल महंगाई बढ़ा दी जाती है। किताब, कापी से लेकर स्कूल वैन का
किराया बढ़ाया जाता है। मगर अच्छे भविष्य की खातिर मजबूर होकर स्कूलों की
मनमानी झेलनी पड़ रही है। अधिकारी भी मौन रहते हैं।
स्नेहलता, अभिभावक
स्कूलों
में किताब, कापी से लेकर बोतल, पेंसिल दी गई हैं। जो बाजार रेट से कापी
महंगी लग रही हैं। सूचना देने के लिए भी स्कूल संचालक एसएमएस के रूपये भी
ले रहे हैं। किताबें भी महंगी हैं।
अंजना जैन, अभिभावक
नियमानुसार
स्कूलों में किसी भी तरह की वाणिज्यिक गतिविधियां संचालित करने की सख्त
मनाई हैं। निजी विद्यालयों के खिलाफ किसी अभिभावक की शिकायत आई तो शिक्षा
विभाग के नियमों के मुताबिक स्कूल संचालक के खिलाफ कार्रवाही अमल में
लाएंगे।
बालमुकुंद प्रसाद, बीएसए