किसान का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र, परिजन के साथ पीड़ित किसान
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उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में जमीन की वसीयत में फर्जीवाड़े का केस सामने आया है। किसान का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र कासगंज से जारी कराया गया। इसके बाद उसकी पूरी संपत्ति कासगंज की ही एक महिला के नाम पर वसीयत करा ली गई। मामला तब प्रकाश में आया, जब सिरसागंज तहसील में वसीयत दाखिल खारिज होने के लिए आई। तहसील कर्मचारी सम्मन लेकर किसान के घर पहुंचा। इस पर किसान के पैरों तले जमीन खिसक गई।
मामला सिरसागंज तहसील के ग्राम कटौरा बुजुर्ग का है। गांव निवासी राजवीर सिंह पुत्र इंद्रपाल सिंह के पास दो अगस्त को तहसील का सम्मन पहुंचा कि उनकी चार संपत्तियों के लिए नामांतरण वसियत प्रार्थनापत्र सावित्री देवी द्वारा प्राप्त हुआ है और तीस दिन अंदर आपत्तिकर्ता अपनी अपत्ति न्यायालय में पेश करें।
शनिवार को मामले की जानकारी लेने किसान जब सिरसागंज तहसील पहुंचा तो वहां देखा कि वसीयत के साथ उनकी मृत्यु का प्रमाण पत्र भी लगा हुआ है। उनकी सारी संपत्ति सावित्री देवी पत्नी मानपाल निवासी प्रहलादपुर मजरा देवरी सोरों कासगंज के नाम में वसीयत कर दी गयी है। क्योंकि मामला करोड़ों की संपत्ति से जुडा हुआ था तो सिरसागंज का प्रशासनिक अमला तुरंत हरकत में आ गया।
एसडीएम सिरसागंज सतेन्द्र सिंह ने बताया कि कासगंज की महिला द्वारा वसीयत के द्वारा जमीन के दाखिल खारिज के लिये वाद किया गया था जिस पर कटौरा बुजुर्ग के किसान राजवीर सिंह ने आपत्ति दर्ज की है। साक्ष्य प्रस्तुत किये जाने पर दाखिल खारिज के वाद को निरस्त कर दिया जाएगा।
देवरी से जारी हुआ मृत्यु प्रमाण पत्र
कटौरा बुजुर्ग के राजवीर सिंह का मृत्यु प्रमाणपत्र प्रहलादपुर देवरी थाना सोरो जनपद कासगंज से जारी किया गया है। मृत्यु के समय उनकी उम्र 79 वर्ष बताई गयी है और प्रमाणपत्र में उनकी मृत्यु 9 मई 2024 को होना दिखाया गया है।
सावित्री के नाम कर दी पूरी जायदाद की वसीयत
जो वसीयत सावित्री देवी ने दाखिल खरिज के लिए तहसील सिरसागंज में दाखिल की है उसमें राजवीर सिंह ने लिखा है कि परिवार के लोगों ने उनके बेटे की हत्या कर दी और खुद के जान बचाने के लिए वे गांव छोड़कर सोरो आ गए। वहीं तबियत खराब होने पर सावित्री ने उनकी कई सालों तक सेवा की और सेवा से खुश होकर वे अपनी संपत्ति की वसीयत सावित्री के नाम कर रहे हैं।
साजिश में शामिल हो सकता है कोई करीबी
सिरसागंज। वादी राजवीर सिंह ने बताया कि उनके नाम की फर्जी वसियत, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और फर्जी वोटर कार्ड लगाकर उनकी सपत्ति एक अन्य जनपद की महिला के नाम में कर दी गयी। इतना ही नही वसीयत की राजिस्ट्री भी हो गई। राजवीर सिंह का कहना है कि इस मामले में कोई ऐसा व्यक्ति शामिल है जो उनके बारे में जानकारी रखता है।