मंदी के दौर से गुजर रहे फिरोजाबाद के कांच चूड़ी उद्योग को सावन के महीने और आने वाले त्योहारी सीजन से संजीवनी मिल गई है । पूरे विश्व में कांच की रंग बिरंगी चूड़ियां एक मात्र फ़िरोज़ाबाद शहर में बनाई जाती हैं । देश के कौन-कौन में फ़िरोज़ाबाद से ही कांच की चूड़ी जाती है जो महिलाओं के कलाई की शोभा बनती है ।
कई हाथों से कांच की चूड़ी गुजरती है तब महिलाओं की कलाई तक पहुंचती है ।कई कारीगर चूड़ी को बनाते हैं तब यह बाजार में बिकने के लिए पहुंचती है । चूड़ी के कारीगर कांच कारखाने के अंदर जिस भट्टी पर काम करते हैं वह भट्टी 1100 डिग्री तापमान पर धधकती है।
फिरोजाबाद की चूड़ी इस समय संकट के दौर से इस कारण भी गुजर रही है क्योंकि चूड़ी के विकल्प के रूप में अन्य कई तरह की चूड़ियां बाजार में आ गई हैं । जैसे लाख की चूड़ी, प्लास्टिक की चूड़ी, मेटल की चूड़ी बाजार में काफी बिक रही है । वहीं कामकाजी महिलाओं ने भी चूड़ी पहनना कम कर दिया है इस कारण भी चूड़ी की डिमांड कम होती जा रही है लेकिन जब भी त्यौहार का सीजन आता है तब फिरोजाबाद के कांच कारखाने में उत्पादन में पहिया घूमने लगता है। सावन के महीने में हरी चूड़ी की डिमांड बढ़ जाती है तो इसके बाद आने वाले नवरात्र , करवा चौथ, दीपावली आदि सीजन में लाल चूड़ी की डिमांड काफी बढ़ जाती है।
राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र आदि कई राज्यों से लाल चूड़ी की डिमांड अधिक होती है। इसलिए फिरोजाबाद की चूड़ी कारखाने में इस समय लाल चूड़ी का उत्पादन काफी मात्रा में हो रहा है। सावन के महीने के ऑर्डर तो कारखाना संचालक पूरे कर चुके हैं और चूड़ी देश के कौने-कौने में पहुंच चुकी है और लाल चूड़ी का उत्पादन हो रहा है । यह उत्पादन आने वाले त्योहारीसीजन को पूरा करेगा। कांच कारखाने दर्रो के चेहरे पर इस बात का इस बार संतोष है कि कई महीनो से चल रहा सुस्ता त्योहारी सीजन ने तोड़ दिया है। सैकड़ो कारीगर जो उत्पादन कम होने से खाली बैठे थे , उन हाथों को काम मिल गया है। उनके चेहरे पर भी मुस्कान है।