वर्ष 1996 तक कोयले की खपत करने वाली कांच इकाईयों का डाटा जिला उद्योग केंद्र ने तैयार कर लिया है। कोयले की खपत के संबंध में सभी कांच इकाईयों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर एनजीटी को भेजने की तैयारी कर ली है।
सुहागनगरी के कांच उद्योगों में वर्षों पूर्व कोयले का प्रयोग किया जाता था। टीटीजेड में आने से पूर्व करीब 400 से 500 इकाईयों का संचालन होता था। इसमें काफी संख्या में इकाईयां कागजों पर ही संचालित होती थीं। कांच उद्योग के नाम पर मिलने वाले कोयले को ब्लैक में बेच दिया जाता था।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद 1996 में टीटीजेड में कोयले का प्रयोग पूर्णतया प्रतिबंधित कर दिया गया। गेल की लंबी चौड़ी शर्तों के आगे 50 प्रतिशत से अधिक उद्यमी मैदान छोड़ गए। वर्तमान में करीब 200 कांच इकाईयां गैस से संचालित हैं। गैस मिलने के बाद कई छोटी इकाईयां रातों रात क्षमतावृद्धि कर बड़ी इकाईयाें की कतार में खड़ी हो गईं। बस यहीं से शुरू हो गया शिकायतों का दौर, जो बदस्तूर जारी है।
नई दिल्ली की सेफ संस्था द्वारा एनजीटी में फीरोजाबाद की 143 इकाईयों के संबंध में क्षमतावृद्धि, प्रदूषण सहित विभिन्न मामलों को लेकर शिकायत दर्ज की गई है। एनजीटी ने कोई फैसला देने से पूर्व जिला उद्योग केंद्र से कोल कैपेसिटी का डाटा तलब किया है। लंबी कवायद के बाद जिला उद्योग केंद्र ने सभी कांच इकाईयों की कोल कैपेसिटी की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे एनजीटी को भेजने की तैयारी है। इसके साथ आठ मार्च को कांच उद्योग के मामले में एनजीटी में फिर सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित है।