फिरोजाबाद। सुहागनगरी में रामलीला का मंचन करने वाले पात्र रामलीला के स्वरूपों में काफी सुखद महसूस करते हैं। हर वर्ष कुछ पात्र बदल जाते हैं तो कुछ पात्र ऐसे भी हैं जो सालों से मंचन का हिस्सा बने हुए हैं। मुख्य पांच पात्रों को मंचन तक घर परिवार से दूर रहना पड़ता है। ये पात्र रामलीला परिसर के निकट हनुमान मंदिर में रहते हैं। रामलीला मेले में करीब 50 पात्र भाग लेते हैं। रामलीला परिसर में सराबोर वाले स्थान पर पात्र लीला का मंचन करते हैं। मंचन के दौरान पात्र कैसा महसूस करते हैं यह जानने के लिए अमर उजाला ने रामलीला के मुख्य पात्रों से बातचीत की।
राम के स्वरूप का मंचन करते हुए बुराइयों से दूर रहने की मिली प्रेरणा
देवकी नगर टापा निवासी सोनू शर्मा (20) पांच सालों से रामलीला में भगवान राम के स्वरूप का मंचन कर रहे हैं। बीएससी की पढ़ाई के साथ-साथ प्राइवेट नौकरी भी करते हैं। राम के स्वरूप में मंचन करने का भाव उनके मन में पड़ोसी मोहन पचौरी को देखकर जागा। रामलीला के पात्रों के चयन के लिए कमेटी बैठी तो सोनू का चयन कर लिया। सोनू कहते हैं भगवान राम की लीला का मंचन करते हुए उनके भाव भी बदल जाते हैं। कोई भी परेशानी नहीं होती और वह भगवान राम के स्वरूप जैसा मंचन करने लगते हैं। शायद पांच सालों से इस भूमिका का मंचन करने का ही प्रभाव है कि अभी तक बीड़ी, तंबाकू, सिगरेट, गुटखा जैसी बुराइयों से वह दूर हैं।
राम के भ्राता की भूमिका में रम जाते हैं : राजा तिवारी
एसआरके कॉलेज से स्नातक करने वाले मोहल्ला दुली निवासी राजा तिवारी चार साल से भरत की भूमिका में मंचन कर रहे हैं। पिछले वर्ष उन्हें लक्ष्मण की भूमिका में मंचन करने का मौका मिला था। वह कहते हैं कि जब भी लीला का मंचन करते हैं तो केवल भगवान राम का ध्यान रहता है। मन जरा भी नहीं इधर उधर नहीं होता। घर वाले यदि सामने आए तब भी उनका मन नहीं डिगता। जीवन में जब भी कोई दिक्कत आती है तब भगवान राम का ध्यान करते ही दिक्कत दूूर हो जाती है। सुबह सबसे पहले भगवान राम दरबार की सेवा करने के बाद ही दिनचर्या की शुुरुआत की जाती है।