डाकघर का सरकारी खजाना जमा करने को लेकर विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही वारदात की वजह बन गई। बिना सुरक्षा के देर शाम खजाने तक जाने वाली धनराशि को लेकर पुलिस और डाक विभाग के कर्मचारी उदासीनता बरतते रहे जिसके परिणाम ने वारदात को अंजाम दिया।
शिकोहाबाद में बुधवार शाम को हुई 19 लाख 8 हजार रुपये की लूट ने सरकारी खजाने की सुरक्षा को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दिया। मोहल्ला मिश्राना से निकले डाक कर्मचारियों ने रास्ते में भी लापरवाही का परिचय दिया। कैश होने के बावजूद हाथ देने पर बाइक को रोक कर युवकों की बात सुनने लगे। स्थानीय बाशिंदों की माने तो डाक कर्मचारियों द्वारा कैश जमा करने से पूर्व थाना पुलिस से भी किसी सिपाही को नहीं बुलाया जाता है। घटना के प्रत्यक्षदर्शी आशीष तिवारी का कहना है कि जिस समय बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया वह दूध लेने जा रहे थे। दो लुटेरे गोपाल डेरी को जाने वाली गली में एक बाइक लिए खड़े थे जबकि दो लुटेरों ने पैदल ही घटना को अंजाम दिया। उनकी बाइक भी गली के किनारे खड़ी थी। जिस स्थान पर घटना हुई वहां महिलाएं भी नल से पानी भर रहीं थीं लेकिन पिस्टलें देखकर डरकर की वजह से वह भाग निकलीं। लोगों ने बताया कि पिछले 6 माह से इस गली में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहने लगा था। उनकी बाइकों पर आर्मी व पुलिस लिखा रहता है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि लुटेरों की एक बाइक जिस पर बैठकर वह भागे थे काले रंग की डिस्कवर थी। कैशियर बंसतलाल जैन ने एसओजी की टीम को घटना से अवगत कराया।
रोज देर शाम जाता था कैश
पोस्ट आफिस से रोज देर शाम कैश जाता था। इसमें सिर्फ डाकघर के कर्मचारी ही साथ रहते थे और धनराशि को बोरी में रखकर तहसील में जमा कराया जाता था। इस दौरान किसी भी प्रकार के बंद वाहन या पुलिस सुरक्षा नहीं होती थी।