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अंतरराष्ट्रीय नर्सेज डे: बहनें बिना डरे कर रहीं हैं संक्रमितों का इलाज

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फिरोजाबाद। कोविड-19 अस्पतालों में तैनात स्टाफ नर्सिंग स्टाफ जीजान से कोरोना संदिग्धों और संक्रमितों का उपचार कर रहा है। एहतियात बरतने के बाद भी नर्सों को कोरोना संक्रमित होने का सबसे अधिक खतरा है। अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स खुद की और परिवार की फिक्र किए बिना शिद्दत से अपना फर्ज निभा रही हैं। 12 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर नर्सों को याद करना बेहद जरूरी हैं। इसका प्रमुख कारण कोरोना की जंग इनकी भागीदारी के बिना जीतना असंभव है।
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दो माह पूरे हो चुके हैं। एक भी छुट्टी नहीं की है। घर पर मां की तबियत भी खराब थी। इसके बाद भी मैं ड्यूटी करने आई। मैं चाहती हूं कि मरीजों को किसी प्रकार की तकलीफ न हो। कोरोना संक्रमितों की भी आए दिन प्रसव कराने पड़ते हैं। हम मरीजों की सेवा के लिए हमेशा तैयार हैं। -प्रतिभा जैन, स्टाफ नर्स
अपनी ड्यूटी के आगे अपनी सुरक्षा का ध्यान भी नहीं रखती हूं। पति कोरोना संक्रमित हो गए। इसके बाद भी मैं ड्यूटी करने आती रही। ड्यूटी के कारण डेढ़ साल के बच्चे की भी देखभाल नहीं कर पा रही हूं। बिना अवकाश नियमित ड्यूटी आ रही हूं। पहले से स्टाफ कम है। यदि हम अवकाश लेने लगे तो मरीजों का ख्याल कौन रखेगा। कोरोना काल में ड्यूटी करते अब मन से ही डर निकल गया है। -रेखा राठौर, स्टाफ नर्स
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सरकारी अस्पताल में मरीज बहुत उम्मीद लेकर आते हैं। ऐसे में हम उन्हें निराश नहीं कर सकते हैं। लोग संक्रमित होने पर तनाव में आ जाते हैं तो उन्हें प्रोत्साहित करते हैं। संक्रमित महिलाओं का प्रसव कराना पड़ता है। चिकित्सक से ज्यादा मरीजों के संपर्क में हम लोग आते हैं। -रश्मि, स्टाफ नर्स, सीएचसी टूंडला
कोरोना संक्रमित भी कोविड अस्पताल में जाने से कतरा रहे हैं। कोविड अस्पताल में हम संक्रमित महिलाओं का इलाज कर रहे हैं। संक्रमित महिलाओं की डिलीवरी भी कराई है। गर्मी के माहौल में पीपीई किट पहनना मुश्किल हैं लेकिन हम मरीजों की जान बचाने के लिए खुद को तकलीफ देने से पीछे नहीं हट रहे हैं। -प्रिया मिश्रा, स्टाफ नर्स
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