घोटाले में फंसे ठेकेदारों ने बचाव के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है। उनका तर्क है कि हमें तो सिर्फ बोरिंग कराने का काम ही विभाग की ओर से दिया गया था। पैनल, टंकी के साथ व केबल विभाग के द्वारा मुहैया कराई गई। ठेकेदारों ने कहा टंकी स्थापित करने के बाद प्रधानों को हैंडओवर के साथ एक वर्ष तक देख-रेख का बांड भरते हैं। कई चालू टंकियों को भी बंद दर्शाया है।
जलनिगम के टीटीएसपी (टैंक टाइप स्टेंड पोस्ट) की स्थापना में करीब 14.52 करोड़ का घपला उजागर होने के साथ ही शनिवार को विभाग में सन्नाटा रहा। सुहागनगर स्थित कार्यालय पर स्टाफ की जुबान पर एक ही सवाल था कि जांच की आंच अफसरों तक आई तो फिर बाबू के साथ स्टाफ भी फंसेगा। चिंता इस बात की सता रही है कि कहीं पुलिस ठेकेदारों की आड़ में उनका भी उत्पीड़न नहीं शुरू कर दें। जलनिगम अफसरों के खिलाफ अभियोग की शासन से अनुमति लेने के पत्र को लेकर पैरवी का काम भी प्रभावी ढंग से शुरू कर दिया है। निगम के ठेकेदारों के तर्क हैं कि मौके पर टीटीएसपी मिली इसके कारण हमारे द्वारा टंकी की स्थापना की हैं। ग्राम पंचायत को हैंडओवर की गई इसका प्रूफ उनके पास है। पंचायत की ही जिम्मेदारी टंकी की देख-रेख की होती है। जलनिगम के द्वारा समर, पैनल, केबल एवं दस हजार किलोलीटर क्षमता की टंकी विभाग की ओर से मुहैया कराई जाती है। ठेकेदार का काम सिर्फ बोरिंग कराना, पंप हाउस व टंकी के स्टेचर को बनाना होता है। ब्लाकवार बीडीओ की ओर से दी गई रिपोर्ट में छोटी-मोटी कमियों को दर्शाया है। यदि किसी टंकी में बिजली का कनेक्शन नहीं हैं तो यह जिम्मेदारी भी विभाग की है। इन्हीं बिंदुओं को लेकर जलनिगम के ठेकेदारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है। क्योंकि अधिकांश वह ठेकेदार रिपोर्ट में शामिल हैं जिनकी टंकियां सिर्फ बंद मिली हैं।