शनिवार को प्रशासन ने गांव नगला गुलाल में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहीत जमीन पर जबरन कब्जा ले लिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अधिग्रहीत जमीन पर खड़ी फसलों को जेसीबी मशीनें चलाकर उजाड़ दिया। विरोध कर रहे किसानों और उनके परिवार की महिलाओं को पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। प्राचीन मंदिर को जीसीबी से ढहा दिया। इस घटना में कई किसान और महिलाएं घायल हुई हैं। पूर्व प्रधान सहित कुछ किसानों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया है। किसानों ने प्रशासन पर अधिग्रहीत जमीन से अधिक पर कब्जा लेने का आरोप लगाया है।
शनिवार सुबह 10 बजे एडीएम कर्मेंद्र सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट, एएसपी, सर्किल के सभी सीओ व एसडीएम पुलिस और पीएसी लेकर गांव नगला गुलाल पहुंच गए। पूरे गांव की नाकेबंदी कर प्रशासनिक अमले ने जमीन पर कब्जा लेना शुरू कर दिया। जैसे ही जेसीबी मशीनें बाजरा के खेत में भूमि को समतल करने के लिए उतरीं, किसानों ने विरोध करना शुरू कर दिया, जिस पर फोर्स ने ग्रामीणों को दौडृ़ा-दौड़ा कर पीटा। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। पुलिस की लाठियों से कई लोग घायल हो गए, जिन्हें बाद में पुलिस की गाड़ियों से जिला अस्पताल भेजा गया। पूर्व प्रधान सर्वेश, रामदास एवं वीरेंद्र सिंह, ब्रजेश, मुन्नालाल, सुरेशचंद्र, सतीशचंद्र, वीरेंद्र सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस ने इन्हें लेकर चलने लगी तो महिलाएं पुलिस के वाहनों पर लटक गईं। पुलिस ने उनको बाहर खींच लिया। अधिग्रहीत जमीन में खड़ी बाजारा की फसल, पेड़, ट्यूवबैल की मढ़ैया और एक शिव मंदिर को भी हटा दिया गया। एक किसान रामसिंह ने बताया कि उनकी एक्सप्रेस-वे के लिए दो बीघा जमीन अधिग्रहीत की जानी थी, लेकिन प्रशासन ने फोर्स के बल पर जबरन तीन बीघा जमीन पर कब्जा कर लिया। उनका कहना है कि अन्य किसानों की भी इसी तरह अधिक जमीन ले ली गई है।
ये है मामला
आगरा लखनऊ ग्रीन एक्सप्रेस वे को जिले के 31 गांवों के किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया था। ग्राम नगला गुलाल के 43 किसान अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं और इनकी मांग थी कि उन्हें भी सैफई की तरह सर्किल दरों का चार गुणा अधिक मुआवजा दिया जाए। किसान इसके लिए न्यायालय भी गए, लेकिन वहां से भी कोई राहत नहीं मिली।
43 किसानों की करीब 6.5 हेक्टेयर भूमि का बैनामा नहीं हुआ था। उसी भूमि पर कब्जा लिया है। किसी किसान पर कोई लाठीचार्ज नहीं किया गया। विरोध को आए छह किसानों को हिरासत में ले लिया था।
चंद्रभानु सिंह, एसडीएम शिकोहाबाद।