सुहागनगरी के परंपरागत कांच उद्योग पर श्रमिक संगठनों की लड़ाई में दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर जहां कई दिनों से हड़ताल के चलते कारखानों में तैयार माल नहीं उठ पा रहा है। वहीं, दूसरी ओर चूड़ी जुड़ाई के लिए श्रमिक न आने के कारण कारखाने बंदी का संकट मंडरा रहा है।
चूड़ी जुड़ाई कार्य में करीब 50 हजार श्रमिक कार्यरत हैं। यह श्रमिक शासन द्वारा निर्धारित 1950 रुपये प्रति सैकड़ा तोड़ा मजदूरी व जुड़ाई के लिए मिट्टी के तेल की डिमांड कर रहे हैं। दो श्रमिक संगठनों की लड़ाई में चूड़ी उद्योग में कार्यरत हजारों श्रमिकों की रोजी रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। एक संगठन ने सोमवार की रात में समझौता किया तो दूसरे ने बुधवार को तोड़फोड़ शुरू कर दिया। इससे लाखों का नुकसान हुआ। श्रमिकों से उग्र प्रदर्शन का असर गुरुवार को भी चूड़ी उद्योग पर देखने को मिला। शहर में करीब 15-20 को छोड़कर अधिकतर कारखानों में सन्नाटा रहा। जुड़ाई के लिए श्रमिक कारखानों से माल लेने नहीं पहुंचे।
उग्र आंदोलन ने उद्यमियों की बढ़ाई चिंता
श्रमिकों द्वारा शहर में किए गए उग्र आंदोलन ने सेवायोजकों की चिंता बढ़ा दी है। सेवायोजकों का कहना है कि जिला, पुलिस प्रशासन व जिम्मेदार अफसरों की अनदेखी से इतना बड़ा आंदोलन हो गया। यदि प्रशासन पहले ही सचेत हो जाता है तो इतना बड़ा नुकसान न झेलना पड़ता। यदि हालात नहीं सुधरे से शुक्रवार से सभी कारखाने बंद कर दिए जाएंगे।