फिरोजाबाद। परिषदीय स्कूलों के छात्र उपस्थिति में गिरावट आई है। इससे शासन ने जिले को डी ग्रेड में शामिल कर दिया है। शिक्षक पहले छात्र संख्या बढ़ाने के लिए घर-घर दौड़े। अब उपस्थिति बढ़ाने के लिए बच्चों के घर चक्कर लगा रहे हैं। शिक्षक जब घर पहुंचते हैं तो पता चलता है कि बच्चा खेत पर है। दरअसल, खेतों में खड़ी धान की फसल को काटने और आलू बुबाई के कार्य में ग्रामीणों ने बच्चों को जुटा दिया है। या बच्चे स्कूल की जगह सुबह ही धान की फसल काटने के लिए घरों से निकल जाते हैं।
सीएम डैशबोर्ड पर प्रति माह मध्याह्न भोजन पर प्रति माह मध्याह्न भोजन ग्रहण करने वाले छात्र-छात्राओं की उपस्थित के आधार पर ग्रेड निर्धारित की जाती है। सितंबर माह की समीक्षा की गई, इसमें जनपद में छात्र उपस्थित 73.63 फीसदी थी। इस कारण शासन ने जनपद को डी ग्रेड में शामिल कर दिया है। जो विभाग के लिए चिंता का विषय है। बीएसए ने शिक्षकों को चेतावनी जारी कर दी है कि नवंबर माह में 80 फीसदी से कम छात्र उपस्थिति वाले विद्यालयों के शिक्षकों पर कार्रवाई होगी।
वहीं, नवंबर माह में निपुण परीक्षा भी होनी है। इधर, खेतों में धान की कटाई और आलू की बुबाई चल रही है। ग्रामीणों के साथ-साथ परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी इस फसल को काटने में व्यस्त हैं। बच्चों के धान की कटाई में लग जाने से इसका सीधा प्रभाव स्कूलों में होने वाली उपस्थिति पर देखने को मिल रहा है। कार्रवाई से बचने के लिए शिक्षक छात्र-छात्राओं के घरों के चक्कर लगा रहे हैं।
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-सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि स्कूलों में किसी भी दशा में बच्चों की संख्या कम नहीं होनी चाहिए। अगर ऐसा होता है तो संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी और शिक्षक का उत्तर दायित्व होगा। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आशीष पांडेय, बीएसए