नगर अंधेरे में डूबा है, लेकिन तालाब किनारे आस्था से आलोकित हैं। ठंडे जल में खड़ीं व्रती सूर्य नारायण का ध्यान कर रही हैं। श्रद्धा के सामने हर कष्ट छोटा है। उनके तप को देखकर ही मन पावन हो जाता है। घाट पर ओम सूर्याय नम: मंत्र का जाप चल रहा है। सबको आदित्य के आने की प्रतीक्षा है।
अंबर में उड़ते पक्षी चहचहा उठते हैं। कुछ ही देर में पेड़ के पीछे लालिमा से भरे सूर्य देव झांकने लगते हैं। धीरे-धीरे बाहर आते हैं और मन हर्षित हो उठता है। अर्घ के समय व्रती गाती हैं, उगेए सूरज देव भाएले भोर हरिया अरघ के बेरिया पूजन के बेरिया, गइली नदी के किनारवा लिही सूरज बाबा अरघ हमार...।
बुधवार की भोर छठ मैया के उपासकों ने उगते सूर्य को अर्घ अर्पित किया। इसी के साथ छठ पर्व का समापन हो गया। इस अवसर पर बच्चों ने घाटों पर खूब आतिशबाजी की। उपासकों ने अर्घ देने के बाद जल पीकर व्रत खोला। पूजा के बाद प्रसाद वितरित किया गया। उपासकों के रिश्तेदारों ने गाय के दूध से आदित्य को अर्घ अर्पित किया।