रामायण विचारों का ग्रंथ है और राष्ट्र का निर्माण भी विचारों पर निर्भर है। प्रभु श्रीरामजी के चरित्र में सत्य, प्रेम और करुणा दर्शित होती है। संपूर्ण रामायण सत्य, प्रेम व करुणा से भरा हुआ है। यह बात ठाकुर बीरी सिंह कालेज में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान आचार्य कौशिकजी महाराज ने कहीं।
उन्होंने कहा कि ईश्वर का जाप करते हैं तो उसमें तीन चीजों की आवश्यकता होती है। मंत्र, माला व मूर्ति। मंत्र सत्य है, माला प्रेम व मूर्ति करुणा है। भगवान शिव-पार्वती के विवाह के बारे में आचार्यजी ने कहा कि शंकर विश्वास और पार्वती श्रद्धा है। विश्वास व श्रद्धा जब आपस में जुड़ते हैं तो वहां पुरुषार्थ रूपी कार्तिकेय का जन्म होता है। हमें यह ध्यान रखना है कि हम जिस का स्मरण कर रहे हैं क्या उसके प्रति हमारे मन में श्रद्धा-भक्ति व आस्था है या फिर मात्र कंठ से ही स्मरण करने का ढोंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु को सदैव हृदय से याद करना चाहिए। वहीं आगामी 25 नवंबर तक कथा का सीधा प्रसारण संस्कार चैनल पर सायं चार बजे से सायं साढ़े सात बजे तक होगा।