जिले में बेहतर होती स्वास्थ्य सेवाओं में एक और उपलब्धि जुड़ गई है। त्वरित क्रियान्वयन और बेहतर चिकित्सकीय व्यवस्थाओं के लिए टूंडला की एक सीएचसी को फाइव स्टार के ग्रेड से नवाजा गया है। मिनिस्ट्री आफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर की रिपोर्ट के अनुसार जिले में जसराना को फोर स्टार, सिरसागंज सीएचसी को थ्री स्टार दिया गया है।
बता दें कि राज्य सरकार ने हाल ही में सामुदायिक स्वास्थ केंद्रों (सीएचसी) के रिपोर्ट कार्ड जारी किए हैं। यह स्टार रेटिंग अप्रैल से लेकर अक्तूबर माह तक की है। इसमें सभी सीएचसी में इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टाफ, मरीजों को दी जाने वाली सुविधाएं, दवा, वैक्सीन और जांचों की उपलब्धता को बारीकी से जांचा गया। जो सीएचसी इन सभी मापदंडों को पूरा करने में खरी नहीं उतरीं उन्हें नाट एलिजिबल घोषित कर दिया गया। मिनिस्ट्री आफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर में रिकॉर्ड होने वाले हर माह के आंकड़ों के आधार पर यह रेटिंग तय की गई। बिल्डिंग के रखरखाव, दवाओं की आपूर्ति, मरीजों को सर्विस की उपलब्धता एवं तमाम बिंदुओं का बेहतर होना माना गया है। टूंडला की एक सीएचसी को पांच स्टार, फोर स्टार ग्रेडिंग में जसराना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का नाम शामिल है। थ्री स्टार सिरसागंज के स्वास्थ्य केंद्र को मिला है। विगत दिनों एचआईएमएस रिपोर्ट में फीरोजाबाद जिले को यूपी में पहला स्थान मिला था।
क्या कहते हैं अधिकारी
भारत सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ग्रेडिंग की। जिले के टूंडला सीएचसी को फाइव स्टार मिले हैं। यूपी में महज दो केंद्रों को ही फाइव स्टार का दर्जा दिया गया है। एनआरएचएम में जिला बुलंदियों की ओर है।
सरजूखान, जिला कार्यक्रम प्रबंधक
एनआरएचएम
एक स्टार के मापदंड
एक से ज्यादा डॉक्टर और स्पेशलिस्ट।
छह नर्सिंग स्टाफ और एएनएम।
लैब टेक्नीशियन।
पुरुषों और महिलाओं के अलग से सुविधाघर।
ऑपरेशन थियेटर की उपलब्धता, भवन के लिए स्टैंड बाय जनरेटर सुविधा।
दो स्टार के मापदंड
दो महीने तक दवा सप्लाई का स्टॉक की उपलब्धता।
दो महीने की वैक्सीन की उपलब्धता।
दो महीने की गर्भनिरोधक साधनों की उपलब्धता।
तीन स्टार के मापदंड
24 घंटे नॉर्मल और विशेषज्ञ डिलिवरी की सुविधा।
छोटे बच्चों कर इमरजेंसी केयर होना।
आवश्यक प्रकार की लैब जांचें हों।
फोर स्टार के मापदंड
शिकायत करने के लिए कंपलेन बॉक्स का होना।
रोगी कल्याण समिति का होना।
फाइव स्टार के मापदंड
हर माह पांच सिजेरियन डिलिवरी की व्यवस्था।
रात में रह रहे मरीजों की संख्या 450 हर माह।
ओपीडी की संख्या 750 हर माह।