टीबी वार्ड में भर्ती मरीज को लगाई गई ऑक्सीजन। संवाद।
फिरोजाबाद। सुबह-शाम ठंड बढ़ने और धुंध छाने से जिले के मेडिकल कॉलेज व निजी अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। पिछले पांच दिनों में ओपीडी में करीब 70 मरीज ऐसे पहुंचे, जिन्हें सांस लेने में तकलीफ बढ़ने पर दोबारा इनहेलर थेरेपी शुरू करनी पड़ी। शुक्रवार को अकेले मेडिकल कॉलेज में सांस संबंधी शिकायत लेकर 60 से अधिक मरीज आए, जिनमें ज्यादातर अस्थमा और फेफड़ों की टीबी जैसी पुरानी बीमारियों से पीड़ित हैं।
मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार के अनुसार, हवा में धूल-धुएं की मात्रा बढ़ने से फेफड़ों की सूजन और सांस नलियों में जकड़न की समस्या गंभीर हो गई है। मरीजों को सांस फूलना, खांसी, गले में जलन और सीने में दर्द जैसी शिकायतें हो रही हैं। अधिकतर को फोराकॉर्ट इनहेलर दिया जा रहा है, जो सूजन कम करता है और सांस नलियों को लंबे समय तक खुला रखता है। कुछ मामलों में अस्थमा अटैक के कारण तत्काल राहत के लिए अस्थाकिन इनहेलर की जरूरत पड़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, दिवाली के बाद से इनहेलर की मांग में अचानक इजाफा हुआ है। रोजाना औसतन 20 मरीज इनहेलर लेने आ रहे हैं।
सावधानी ही सबसे बड़ा उपचार
सीएमएस डॉ. नवीन जैन ने कहा, सांस लेने में तकलीफ या सीने में जकड़न महसूस होते ही तुरंत अस्पताल आएं। प्रदूषण से बचाव जरूरी है। मास्क पहनें, डॉक्टर की बताई दवाएं नियमित लें।
ऐसे करें बचाव:
नियमित दवा जारी रखें।
गुनगुना पानी पिएं।
फास्ट फूड से परहेज करें।
सफाई का ध्यान रखें, हाथ धोकर भोजन करें।
बारिश में भीगने से बचें।