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कैलोरोफिक वैल्यू घटी

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फिरोजाबार्द। इंधन के रूप में खपने वाली नेचुरल गैस की कैलोरोफिक वैल्यू (ऊष्मीय मान अथवा ज्वलनशीलता) घट जाने की वजह से कांच इकाइयों पर गैस खपत का बोझ बढ़ गया है। कांच एवं चूड़ी कारखानेदारों की माने तो नेचुरल गैस की कैलोरोफिक वैल्यू घट जाने के कारण गैस फर्नेश में औसतन पांच प्रतिशत गैस ज्यादा खर्च होगी। इससे कांच कारखानेदारों के ऊपर दैनिक खर्च के रूप में पांच से 10 हजार रुपये का अतिरिक्त भार होगा।
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जिले में संचालित करीब 200 इकाइयों में प्रतिदिन 11.5 लाख घनमीटर रियायती दर वाली नेचुरल गैस और 2.5 लाख घनमीटर व्यवसायिक श्रेणी वाली आरएलएनजी कुल लगभग 14 घनमीटर नेचुरल गैर्स इंधन के रूप में फुंकती है। अब तक के उच्चतम दर 35.71 रुपये प्रति घनमीटर के हिसाब से नेचुरल गैस का भुगतान कर रहे कांच उद्योग जगत के समक्ष मंदी के अलावा और तमाम दुश्वारियां हैं।
कांच कारखानेदारों की माने तो मंगलवार को कांच फर्नेश में फुंकने वाली नेचुरल गैस की कैलोरोफिक वैल्यू सामान्य 9100 से घट कर 8500-8100 एमएमबीटीयू प्रति घनमीटर रह गई है। इस कारण से सभी कारखानों में प्रतिदिन हिसाब से करीब पांच प्रतिशत अधिक गैस की खपत हो रही है। इसका सीधा असर कांच इकाइयों पर निर्धारित होने वाले गैस बिल पर पड़ेगा। यानि कांच कारखानों पर पांच से 10 हजार रुपये प्रतिदिन का अतिरिक्त भार होगा।
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कांच व अन्य इकाइयों में ईंधन के रूप प्रयुक्त नेचुरल गैस की कैलोरोफिक वैल्यू घटती बढ़ती रहती है। ज्यादा अंतर आने पर कांच इकाइयों को कैलोरोफिक वैल्यू के अनुसार ही गैस की दरों का निर्धारण होता है। ऐसे में कांच इकाइयों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
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आशीष केशरवानी, क्षेत्रीय विपणन अधिकारी गेल गैस लिमिटेड
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