गांवों को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) घोषित करने से पूर्व नहीं की जांच
कई शौचालय अधूरे, कुछ बनवाने में जुटे, खुले में शौच जाने को विवश ग्रामीण
बजीरपुर कोटला गांव में शौचालय अभी तक अधूरे हैं। इसके बावजूद प्रशासन ने गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया। कई ग्रामीण अभी शौचालय बनवाने में जुटे हैं। अधिकांश ग्रामीण खुले में शौच जाने को विवश हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कुछ दिन जोर दिया गया लेकिन अब कोई आता नहीं।
ढाई हजार आबादी वाले नारखी ब्लाक के बजीरपुर कोटला गांव में 290 शौचालय बनवाए गए हैं। कई शौचालय अभी तक अधूरे हैं लेकिन विभाग ने गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया। ‘अमर उजाला’ की टीम गांव पहुंची तो नजारा अलग था। बजीरपुर कोटला निवासी राधेश्याम के शौचालय की सीट गड्ढे में धंसी मिली। दिनेशचंद्र दिवाकर ने कहा कि शौचालय तो बना लेकिन गड्ढे नहीं बनाए गए। कहीं शौचालय अधूरे पड़े थे तो कहीं बनवाए जा रहे थे। कई ग्रामीणों ने बताया कि
अधिकांश ग्रामीण खुले में शौच जाते हैं।ट
ग्रामीण बोले खुले में शौच जाना मजबूरी...
- शौचालय नहीं बनाया गया तो खुले में शौच जाना मजबूरी है। प्रधान के साथ कई लोगों से शौचालय निर्माण के लिए कहा, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
बंटू बजीरपुर कोटला
- हमारे परिवार में दस सदस्य हैं। दो भाई शादीशुदा हैं एवं मां एवं पिता। हमारे घर में गांव की राजनीति के तहत प्रधान ने शौचालय नहीं बनवाया है। इसके कारण खुले में शौच जाने को हम सभी विवश हैं।
गुड्डू बजीरपुर कोटला
- शौचालय पूर्ण नहीं कराया गया है। सीट तक नहीं रखवाई गई है। ऐसे में खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। मालूम नहीं कैसे गांव को ओडीएफ घोषित किया गया।
दशरथ सिंह बजीरपुर कोटला
स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीणों को खुले में शौच नहीं जाना चाहिए। गरीबों को शौचालय बनाने की धनराशि मिलेगी। सुविधा संपन्न को स्वयं ही शौचालय बनवाने हैं। इसका लाभ गांव के बाशिंदों को होगा। साफ-सफाई रहेगी तो रोग कम होंगे। ग्रामीण खुद ही पहल करें।
राजीव नयन गुप्ता
जिला समन्वयक स्वच्छ भारत मिशन फीरोजाबाद।