फिरोजाबाद। स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय में तैनात 72 प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसर अब अपने निजी क्लीनिक पर प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। शासन का आदेश आने के बाद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने सभी चिकित्सकों से शपथ पत्र लिया है। प्राइवेट प्रैक्टिस की निगरानी के लिए टीम गठित की जाएगी। आदेश आने पर मेडिकल कॉलेज के कुछ चिकित्सक चिंतित हैं। कई चिकित्सक तो ओपीडी टाइम में भी अपने क्लीनिकों का संचालन करते हैं। बीते सप्ताह इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद गुप्ता के याचिका पर सुनवाई करते हुए मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसरों के प्राइवेट प्रैक्टिस को लेकर सरकार से जवाब मांगा था। इसके बाद 6 जनवरी को प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को तत्काल प्रभाव से प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। प्राचार्य डाॅ. योगेश गोयल ने सभी प्रोफेसर व एसिस्टेंट प्रोफेसर से प्राइवेट प्रैक्टिस न करने पर शपथ पत्र मांगा है।
मेडिकल कॉलेज में 72 असिस्टेंट प्रोफेसर, प्रोफेसर, एक मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की तैनाती है, जो इस दायरे में आते हैं। सभी से शपथ पत्र ले लिया है। प्राचार्य डाॅ. योगेश गोयल ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के सभी चिकित्सकों से शपथ पत्र दे दिया है। सभी चिकित्सकों ने सहमति जताई है कि वह शासन के नियमों का पालन करेंगे। इसके बाद भी यदि कोई डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त पाया गया तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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प्राइवेट प्रैक्टिस से ठगे जा रहे थे मरीज
-मेडिकल कॉलेज में तैनात डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस के कारण मरीजों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही थीं। मरीजों के अनुसार जो चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं, उनके कंपाउंडर मरीज से कह देेते हैं कि अच्छा इलाज कराना है तो प्राइवेट में जाओ। मरीजों को सरकारी अव्यवस्थाओं का डर दिखाकर संबंधित डॉक्टर के निजी क्लीनिक पर उपचार कराने के लिए तैयार करता है। ओपीडी में डॉक्टर भी जांच लिखने के बाद संबंधित व्यक्ति से ऑपरेशन के विषय में जानकारी लेने की बात कहते हैं। वहीं व्यक्ति मरीजों को निजी अस्पताल ले जाने तथा उनसे सुविधा शुल्क जमा कराने का कार्य करता है। इससे कभी कभार जांच होने पर डॉक्टर का दामन साफ बचा रहता तथा शिकायत को झूठा करार दे दिया जाता।