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रोकने के प्रयास हुए पूरे, फिर भी बढ़ गए 1474 बाल श्रमिक

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रोकने के प्रयास हुए पूरे, फिर भी बढ़ गए 1474 बाल श्रमिक
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सुहागनगरी में 2021 के अंत में हुए सर्वे में मिले 8864 और 2017 में मिले थे 7390 कामकाजी बच्चे व किशोर
संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद। औद्योगिक नगरी फिरोजाबाद में बाल श्रम का ग्राफ सतत बढ़ रहा है। यह हाल तब जब विविध योजनाओं के माध्यम से बालश्रम रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। एक निजी संस्था द्वारा किए सर्वे में शहर के सभी 70 वार्डों में कुल 8864 बाल श्रमिक काम करते मिले हैं। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से यह संख्या वर्ष 2017 में कराये सर्वे से 1474 अधिक है। ऐसा लग रहा है कि बाल श्रम रोकने के लिए चल रही योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गईं हैं।
वित्तीय वर्ष 2021-22 में औद्योगिक नगरी फिरोजाबाद में स्कूल ड्रॉप आउट बच्चों को चिह्नित कर सर्वे कराया गया। कानपुर की सोशल डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट सोसायटी (एसडीएमएस) के सर्वे में नगर निगम एरिया के सभी 70 वार्डों में कुल 8864 बच्चे घरों अथवा अन्य जगहों पर तरह-तरह के काम करते मिले। छह से आठ वर्ष के बच्चों की संख्या 2216, नौ से 13 वर्ष आयु वर्ग के 5390 बच्चे हैं। संस्था की सर्वे रिपोर्ट में स्कूल नहीं जाने वाले 14 से 17 वर्षीय 1258 किशोरों के नाम भी शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के हिसाब से नगर निगम एरिया में स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों व किशोरों की संख्या में पांच वर्ष के दौरान 1474 का इजाफा हुआ है। वर्ष 2017 में राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के तहत कराये गये सर्वे के दौरान निगम एरिया में छह से 17 वर्षीय बालकों व किशोरों की संख्या 7390 थी। जिनमें 1500 बच्चे छह से आठ, 2800 से बच्चे नौ से 13 वर्ष के और 3090 किशोर 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के थे।
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योजनाएं महज कागजों में
बाल श्रम से मुक्त कराने एवं कामकाजी बच्चों को शिक्षा एवं स्वास्थ्य की मुख्य धारा से जोड़ने को केंद्र व प्रदेेश सरकार की तीन योजनाएं संचालित हैं। स्पांसर स्कीम के तहत एकल अभिभावक बच्चे को 2500 रुपये पढ़ाई-लिखाई मिलते हैं। 43 बच्चों में महज 11 को ही गत वर्ष योजना का लाभ मिला। वहीं स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों में शुमार बाल श्रमिकों को 627 बच्चों को ही सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय स्कूलों में दाखिला दिलाया जा सका है।
ट्रांसफर कै श कंडिशनल स्कीम का नाम बदल कर अब बाल सेवा योजना कर दिया गया है। इस योजना के तहत जिला में अभी बजट अनुपलब्ध होने की बात कही गई। हालांकि कोविड काल में माता अथवा पिता में किसी एक को खोने वाले कुल 94 बच्चों को नियमानुसार 4000 रुपये के हिसाब नौ माह की वृत्तिका दी जा चुकी है। एनसीएलपी के तहत बाल श्रम स्कूल खोले जाने का प्रावधान है। इस योजना जुड़ी फाइल अभी भी केंद्र सरकार के पास अटकी हुई है।
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एसडीएमएस संस्था के सर्वे का जिला स्तरीय अधिकारियों से सत्यापन कराया है। सत्यापन के आधार पर देखा जाए तो निजी संस्था की सर्वे रिपोर्ट में खामी होने की बात सामने आ रही है। हमने संस्था के प्रतिनिधियों को बुलाया है। बच्चों के हित वाली योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी। अगर कोई बच्चा पात्रता के बाद भी लाभ से वंचित है तो उसे लाभ दिलाया जाएगा।
- चर्चित गौड, मुख्य विकास अधिकारी व परियोजना अधिकारी बालश्रम उन्मूलन कार्यक्रम
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