कांच उद्योग के क्षेत्र में ऊर्जा की बचत एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में वर्षों से कार्य कर रही टैरी संस्था ने गैस की बर्बादी रोकने को नई तकनीकी तैयार की है। नई तकनीकी से चूड़ी कारखानों में चलने वाली सिकाई भट्ठी की गैस व हवा को उचित मात्रा में नियंत्रित कर गैस की खपत को 30 से 40 प्रतिशत तक कम करने का सफल प्रयोग किया गया है।
टैरी संस्था द्वारा कांच उद्योग को नई संजीवनी प्रदान की गई है। टैरी द्वारा नई डिजाइन की पाट भट्ठियां तैयार की गईं, जिससे 33 प्रतिशत तक गैस की बचत हुई। अब टैरी संस्था द्वारा चूड़ी कारखानों में चलने वाली सिकाई भट्ठी की गैस व हवा की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए नई तकनीक तैयार की गई है। पूर्व में ऑपरेटर पर कई जिम्मेदारियां होने के कारण गैस व हवा की मिक्सिंग प्रभावी रूप से नहीं हो पाती थी, इससे काफी मात्रा में गैस की फिजूलखर्ची हो रही थी। नई तकनीकी की खासियत है कि कंट्रोल पैनल के जरिए आटोमैटिक रूप से गैस व हवा की मिक्सिंग होती रहती है। इसके जरिए एक कंट्रोल पैनल पर लगे बटन को दबाकर गैस व हवा को आटोमैटिक नियंत्रित कर दिया जाता है। काम शुरू होने के समय बटन दबाकर भट्ठी चालू कर दी जाती है और काम बंद होने पर बटन से ही भट्ठी बंद की जाती है। बीच में भट्ठी की आवश्यकतानुसार ताव व झल के लिए गैस व हवा की उचित मात्रा अपने आप घटती-बढ़ती रहती है।
टैरी द्वारा नई तकनीकी का सैलई स्थित राधा ग्लास वर्क्स में सफलता पूर्वक प्रयोग किया गया है। तकनीकी को सफल बनाने में ऊर्जा संरक्षण परामर्शदाता बीएसी शर्मा, राधा ग्लास वर्क्स के मैनेजर हाजी गुल बशर व श्रमिकों का भी सहयोग है।
किस तरह तैयार की गई नई तकनीकी
गैस की बचत के लिए टैरी संस्था द्वारा दो अलग-अलग कंट्रोल पैनल तैयार किए गए हैं। पहला कंट्रोल पैनल गैस की मैन पाइप लाइन से जोड़ा गया है, जिसमें गैस व हवा की आटोमैटिक मिक्सिंग की जाती है। दूसरा कंट्रोल पैनल बना गया है, जिसमें हर समय भट्ठी का टेंपरेचर व हवा की स्थिति का आंकलन होता है। टेंपरेचर व हवा की मिक्सिंग में तापमान के अनुसार स्वत: परिवर्तन होता रहता है।
नई तकनीक पर खर्च होंगे 3.50 लाख
टैरी के परामर्शदाता पीयूष शर्मा का कहना है कि नई तकनीकी लगाने में करीब 3.50 लाख का खर्च आता है, परंतु इससे होने वाली 30-40 प्रतिशत तक गैस की बचत से कुछ ही महीने में इसकी लागत निकल आती है। इस तकनीकी का प्रयोग करने से शहर के पर्यावरण को फायदा होगा। सेवायोजकों के साथ श्रमिकों को कार्य करने में काफी सहजता होगी।
वर्तमान में कांच उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहा है। ऐसे उद्योग लगाना टेड़ी खीर साबित हो रहा है। उद्यमी किसी तरह उत्पादन लागत कम करने को प्रयासरत हैं। इसमें टैरी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पहले जहां प्रतिदिन 750 से 850 यूनिट तक हर रोज गैस की खपत होती थी। अब नई तकनीक लगाने के बाद हर रोज 400 यूनिट तक ही गैस की खपत हो रही है, जिससे साल में करीब दो लाख रुपये की बचत होगी।
चंद्रप्रकाश शर्मा, राधा ग्लास वर्क्स