शिकोहाबाद पूर्व सैनिक चीन वॉर्डर पर हुए हमले के बाद विचार विमर्श करते हुए।
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शिकोहाबाद(फिरोजाबाद)। लद्दाख की गलवां घाटी में चीन की हरकत से सैनिकों के गांव नगला गुलाल में आक्रोश है। इस गांव के हर घर से लोग सेना में सेवाएं दे चुके हैं और वर्तमान में भी कई सैनिक सीमा पर मुस्तैद हैं। घटना को लेकर मेजर रामवीर सिंह शिक्षण संस्थान सेक्टर दो आवास विकास कॉलोनी में पूर्व सैनिकों की बैठक हुई। इसमें वीर शहीदों श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही निर्णय लिया कि कोई चीन का सामान नहीं खरीदेगा। बैठक में पूर्व सैनिक समिति उपाध्यक्ष मेजर रामवीर सिंह, हवलदार ध्रुवज जीत सिंह, सूबेदार ओंकार सिंह, सूबेदार मेजर प्रमोद कुमार, नायव सूबेदार अनवर सिंह, ज्ञनिराम, सुजान सिंह, आरपी यादव, ग्रीस चंद्र, दाराराम और छोटेलाल यादव आदि मौजूद रहे।
भारत की सीमा में घुसने का वर्षों से प्रयास करती रही है चीन की सेना
- रिटायर्ड हवलदार सन 1988 से 1990 तक लद्दाख में सेवारत रहे। उन्होंने बताया कि उस मय मुझे चीन सीमा पर छागा पोस्ट पर तथा दमचुक पोस्ट पर काम करने का मौका मिला। उस समय भी चीन की फौज एलओसी का उल्लंघन करके भारत की रजिंगला पोस्ट में घुसने की नाकाम कोशिश करती थी। जिसके परिणाम स्वरूप कई बार आपस में झड़प होती रहती थी। उसके बाद फ्लेग मीटिंग करके आपसी सहमत बन जाती थी। अबकी बार चाइना ने हिंदुस्तान की फौज को बड़ा धोखा देकर प्रायोजित एलओसी पर घुसकर खूनी संघर्ष किया। जिससे हमारे 20 बहादुर सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए।
ध्रुवजीत, सेवानिवृत हवलदार
- चीन शुरू से ही धोखेबाज रहा है। इसने हमेशा से धोखे में ही देकर भारत पर हमला किया। चाइना में इतनी ताकत नहीं है कि वह भारत की फौज पर सामने से बार कर सके, लेकिन हमारी सेना ने घात लगा कर किये हमले को टालते हुए जो पलटवार किया, उससे हमारी सेना के इरादे जाहिर होते हैं। आज भारत की सेना विश्व में सबसे अच्छी है।
सूवेदार, मेजर रामवीर सिंह गढ़सान
- चीन की सेना द्वारा जो घटना की है, उससे भारतीय फौज और जनता में आक्रोश व्याप्त है। हमारा देश इस संकट की घड़ी में एक साथ है। हमारे जवानों की शहादत पर पूरे देश को गर्व है। अपने अनुभवों को साझा करते हुए सूवेदार ने चाइना को धोखेबाज बताया।
सूबेदार ओमकार सिंह