अरविंद पर कार्रवाई कर रामगोपाल को दिए संकेत
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समाजवादी पार्टी में चल रहे घमासान के बीच नए घटनाक्रम में सांसद रामगोपाल यादव के भांजे अरविंद यादव को पार्टी निकालने के बाद जिले की सियासत और गर्मा गई। इस जिले में सांसद रामगोपाल यादव का वर्चस्व और दबदबा है इसलिए सपा अध्यक्ष शिवपाल यादव की इस कार्रवाई को सीधे रामगोपाल यादव को चुनौती माना जा रहा है। ताजा घटनाक्रम पर जिले के प्रमुख सपा नेताओं ने आफ द रिकार्ड तल्खी भरी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अब सांसद अक्षय यादव और प्रोफेसर रामगोपाल यादव के आदेश का इंतजार है।
सपा के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद रामगोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव फीरोजाबाद से सांसद चुने जाने के बाद से जिले में रामगोपाल यादव का वर्चस्व है। मुलायम सिंह हो या मुख्यमंत्री अखिलेश यादव फीरोजाबाद जिले पर कोई भी फैसला रामगोपाल यादव ही करते हैं। एमएलसी के चुनाव में डा. दिलीप यादव के साथ भांजे अरविंद यादव को प्रत्याशी बनाने का अंतिम फैसला सांसद रामगोपाल यादव का ही था। जिले में सपा की राजनीति में अरविंद यादव का कद काफी बड़ा रहा। प्रशासन से लेकर पार्टी संगठन तक अरविंद यादव की तूती बोलती थी। चूंकि वह रामगोपाल यादव के भांजे थे इस लिए सपा के आम कार्यकर्ता भी अरविंद यादव से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश में रहते थे। अब जब सैफई परिवार में चल रहे घमासान के बीच प्रदेशाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद शिवपाल यादव ने पहला निशाना अरविंद यादव को बनाया है तो इसके तमाम अर्थ सपा में लगाए जा रहे हैं। कोई कुछ भी खुल कर नहीं बोल रहा है लेकिन आफ द रिकार्ड तल्खी रामगोपाल यादव के समर्थक नेता दिखा रहे हैं। एक विधायक ने कहा कि यह तो राजनीति है सब चलता है आज पार्टी से बाहर निकाला है कल वापस भी ले लेंगे।