मैं तो विधवा हूं। पिछले तीन दिनों से कतार में लग रहीं हूं। कल तो गेट तक पहुंच गई, लेकिन समय समाप्त होने की बात कहकर बैंक ने लौटा दिया। आज अजान होते ही घर से निकली। ढाई बज गए अभी तक रुपये नहीं मिला। कैसे चलाऊं घर का खर्चा। कोई उधार देने को तैयार नहीं। यह दर्द बयां कर रही थीं हजरतगंज गालिबनगर निवासी मुवीना बेगम। गुरुवार को वह एचडीएफसी बैंक के बाहर कतार में बैठी अपनी बारी का इंतजार कर रही थीं। उनकी तरह सैकड़ों बुजुर्ग पैसा बदलने को खड़े थे।
एक बजे तक खाताधारक और एक बजे के बाद बिना खाताधारक का काम होने की बैंक की नई व्यवस्था की अधिकतर लोगों को जानकारी नहीं थी। तड़के चार बजे से कतार लगे लोगों को घरों पर सूचना देनी पड़ी कि दोपहर के बाद नंबर आएगा। कुछ ने सुबह का खाना कतार में बैठकर ही खाया। जाटवपुरी निवासी नसीमा बेगम का कहना है कि पिछले दो दिन से बैंकों के चक्कर लगा रहीं हूं,कैश नहीं बदल रहा। घर पर आटा नहीं कोई उधार देने को तैयार नहीं। सुबह छह बजे से कतार में लगीं हूं। यहां धक्के और डंडे मिल रहे हैं। आकाशवाणी रोड निवासी नाजमी का बोलीं कि पहले पंजाब बैंक गए तो वहां पैसा खत्म हो गया। आज यहां आई। शाम हो गई कैश नहीं मिला। आजाद नगर निवासी सरबती देवी कतार में खड़ी थी, बोलीं बेटा मेरे सहारेउ के लें कोई नाएं, दो हजार रुपया बदलवे आई हूं,। लेकिन नंबर नाएं आयो,कौन से कहूं।
कई बैंकों में कैश खत्म,छंटी भीड़
बस स्टैंड के सामने ही स्थित एक्सिस बैंक, ओबीसी बैंक छिंगामल का बाग आदि बैंकों में दोपहर के ही बाद कैश खत्म हो गया। बैंक अपने खाताधारकों को पहले तरजीह दे रही हैं।