मनमानी पर उतारू मिलावटखोर
इनमें से 56 नमूने खाद्य पदार्थ विभाग के मानक को पूरा नहीं कर रहे थे। खास बात यह है कि इसमें अब तक 268 वाद भी दायर हो चुके हैं। बावजूद इसके अभी भी मिलावटखोरी पर नकेल नहीं कसी जा सकी है। इतना ही नहीं मिलावटखोरी करने वालों पर एक करोड़ 24 लाख का अर्थदंड भी लग चुका है, लेकिन जुर्माने का डर छोड़कर लोग मनमानी करने में लगे हुए हैं।
रिपोर्ट आने में हो जाती है देरी
जिले से लिए जाने वाले सैंपल की रिपोर्ट लखनऊ से आती है। यहां से सभी सैंपल भरकर लखनऊ को जाते हैं। पूरे राज्य की लैब होने पर रिपोर्ट काफी देरी से आ पाती है। जिस वजह से मिलावटखोरों के हौसले बढ़ते जाते हैं। चेकिंग के बाद फिर से मिलावटखोरी शुरू कर देते हैं।
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यह है उपभोक्ता के अधिकार
उपभोक्ता कभी भी अपनी स्थानीय प्रयोगशाला में जाकर जांच करवा सकता है।
इसके लिए उपभोक्ता स्वतंत्र रूप से भी मिलावट होने पर वाद दायर कर सकता है और न्याय पा सकता है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की लखनऊ में मोबाइल वैन भी है जिस पर तुरंत रिपोर्ट निकाल सकते हैं।
पनीर, दूध के नमूने सर्वाधिक फेल
जिले में दूध, पनीर और मावा से बनीं मिठाईयों के नमूने सबसे ज्यादा फेल होते हैं। कई बार सिंथेटिक मावा, पनीर, दूध पकड़ा जा चुका है। खाद्य विभाग के मुताबिक, दूध के 80 फीसदी नमूने फेल होते हैं।
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