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साईं संत पुरुष थे, अवतार नहीं

Wed, 25 Jun 2014 05:30 AM IST
Firozabad
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फीरोजाबाद। शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा साईं बाबा पर की गई टिप्पणी से साईं भक्त आहत दिखे। वहीं सुहागनगरी के मंदिरों के महंतों ने कहा कि साईं पुरुष थे अवतार नहीं।
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- हनुमान मंदिर के महंत जगजीवन राम मिश्र इंदौजी महाराज कहते हैं कि साईं बाबा महापुरुष हैं लेकिन अवतार नहीं। 1922 में शिरडी में साईं मंदिर बना धार्मिक आस्था जुड़ी हो सकती है लेकिन ईश्वर नहीं कह सकते।

श्री बांके बिहारी मंदिर के महंत मुन्नालाल शास्त्री ने कहा ऐसे संत पुरुष जिन्हें आशीर्वाद देते हैं उनके कार्य सफल हो जाते हैं। ईश्वर ने 24 अवतार लिए तथा 33 करोड़ देवता हैं सभी का शास्त्रों में जिक्र है।
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- हरिओम शास्त्री आचार्य ने कहा कि साईं को भगवान नहीं कहें लेकिन किसी जाति अथवा धर्म में भी बांधना गलत है। इस तरह की टीका टिप्पणी गलत है।

- हनुमान संस्कृत महाविद्यालय के व्याकरण प्रवक्ता राम प्रकाश शास्त्री ने कहा कि शंकराचार्यजी की बात से हम सहमत नहीं हैं। जो संत है उनकी कोई जाति नहीं होती है। टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।

भक्त बोले बढ़ेगी बाबा की ख्याति
साईं भक्त नरेश पंजाबी ने कहा कि साईं जब जीवित थे तभी से आलोचना होती रही। इससे प्रसिद्धि मिली। जो उनके दर गया सभी का भला हुआ।

मनोज कटारिया ने कहा कि शंकराचार्य अपने मूल पथ से भटक गए हैं। साईं की भक्ति के कारण ही आज मेरा कारोबार ठीक हुआ। टिप्पणी करना गलत है।

इस बात को तो आज तक कोई सिद्ध नहीं कर पाया कि साईं बाबा हिंदू थे या मुसलमान तो फिर शंकराचार्यजी कैसे कह सकते हैं कि बाबा मुसलमान थे।
-आरएम गुप्ता, रेलवे के पूर्व अधिकारी

साईं बाबा का नाम ही भक्तों के कष्टों के निवारण की दवा है। उनके नाम के साथ राम मंदिर को जोड़कर राजनीति करना गलत है।
-पीपी त्रेहन, टूंडला

हिंदू या मुसलमान सभी साईं बाबा को मानते हैं। हर धर्म के भक्त बाबा के दरबार में पहुंचते हैं। पूरे देश में बाबा के मंदिर बन रहे हैं। इसे देख बौखलाना गलत है।

इंसाफ अली, टूंडला

स्वामी स्वरूपानंदजी ने जो कुछ भी कहा है वह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। राम मंदिर को लेकर किसी अन्य की आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए।
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-नितेश चौहान, टूंडला
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती हिंदू समाज को ही बांटने का काम कर रहे हैं। उनके पास क्या प्रमाण है कि साईं बाबा हिंदू नहीं थे और मुसलमान वहां नहीं जाते।
-विपिन माहौर, टूंडला

पिछले सौ वर्षों से शिरडी के साईं बाबा के प्रति भक्तों की आस्था बढ़ रही है। शंकराचार्य का बयान हताशा भरा ही नहीं भक्तों की भावनाओं से खिलवाड़ है।
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