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कुछ हुआ सुधार बहुत की दरकार

Tue, 06 Aug 2013 05:33 AM IST
Firozabad
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जनपद की बीमार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अमर उजाला द्वारा लगातार चलाई जा रही मुहिम का असर सोमवार को दिखाई दिया। अधिकांश चिकित्सक अपने कक्षों में मरीजों को परामर्श देते दिखाई दिए। वहीं वार्ड में खाली पलंगों पर साफ चादर बिछी थीं। हालांकि कई स्वास्थ्य केंद्रों का ढर्रा सोमवार को भी सुधरा दिखाई नहीं दिया।
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चर्मरोग विशेषज्ञ के कक्ष में रही भीड़
फीरोजाबाद जिला अस्पताल में सोमवार सुबह दस बजे चर्मरोग के मरीजों की संख्या 80 का आंकड़ा पार कर चुकी थी। दस बजे तक डा. सुधाकर राय करीब 30 मरीजों का उपचार कर चुके थे। भीड़ अधिक होने के कारण मरीज धूप में खड़े थे।

दवा के लिए करनी पड़ी मशक्कत
मरीजों को दवा के लिए मशक्कत करनी पड़ी थी। मरीजों की संख्या अधिक होने के बाद भी दो विंडो से दवा का वितरण किया जा रहा था। जबकि एडी डा. जेपी यादव का आदेश था भीड़ ज्यादा होने पर एक और काउंटर की व्यवस्था की गई। हालांकि काउंटर भी बना था लेकिन वो बंद था।
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गायब थे हड्डी रोग विशेषज्ञ
कक्ष संख्या 17 में बैठने वाले हड्डी रोग विशेषज्ञ सोमवार को भी अनुपस्थित थे। चिकित्सक का इंतजार कर रहे रेहना निवासी सरोज व मोहम्मदीपुर निवासी संजय का कहना था कि वह सुबह नौ बजे से बैठे हुए हैं साढ़े दस बजे गए लेकिन चिकित्सक नहीं आए। सीएमएस डा. केपी गर्ग का कहना था कि चिकित्सक अवकाश पर नहीं हैं।

चिकित्सक न फार्मासिस्ट कैसे हो इलाज
डी टाइप हेल्थ सेंटर रामनगर में चिकित्सक और न फार्मासिस्ट दोनों की तैनाती नहीं है। ऐसे में मरीजों को उपचार कौन करें इसका जबाव किसी के पास नहीं है। इस कारण डी टाइप हेल्थ सेंटर पर दिन में भी ताले पड़े नजर आए।

स्टाफ के अभाव में बंद हुई नसबंदी सुविधा
डी टाइप हेल्थ सेंटर पर महिलाओं की नसबंदी कराने के लिए सुविधा मुहैया है। डा. कमलेश वर्मा का कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण महिलाओं को जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। मरीज पानी के लिए तरसते नजर हैं। चिकित्सक घर से पानी लेकर आते हैं। फार्मासिस्ट की तैनाती न होने के कारण चिकित्सक ही दवा का वितरण करते हैं।

मरीजों का चल रहा था उपचार
सिरसागंज अस्पताल से गायब रहने वाले चिकित्सक रविवार रात को ड्यूटी पर दिखाई दिए। सोमवार को आपातकालीन सेवा शुरू होने के साथ ही ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों का उपचार किया जा रहा था।

17 में से सिर्फ सात चिकित्सक ही तैनात
शिकोहाबाद पीएचसी में 17 के स्थान पर सात चिकित्सकों की तैनाती होने पर मरीजों को उपचार के लिए घंटो इंतजार करना पड़ा था। आपात कालीन कक्ष में भी मरीजों को उपचार दिए जाने का काम किया जा रहा था।


टूंडला पीएचसी के आपात कालीन कक्ष में ताला लगा हुआ था। वहीं ओपीडी में सभी चिकित्सक समय से मौजूद नजर आए। सीएमएस अपने कक्ष में बैठकर सरकारी कार्य में व्यस्त थे। आपात कालीन कक्ष में ताला लगा होने पर सीएमएस बोले मरीज आने पर खुलवा दिया जाता है।


जसराना सीएचसी में चिकित्साधीक्षक के साथ संविदा पर तैनात चिकित्सक मरीजों को देख रहे थे तो स्टाफ भी अपना काम कर रहा था। सुबह सात बजे पूरे अस्पताल की सफाई हो गई। पूर्व में जहां मरीजों को मांगने पर भी चादर नहीं मिलती थीं वहीं मरीजों के अभाव में भी पलंगों पर चादर बिछा दी गई। नगला किसनी से मारपीट का मामला आने पर उसे कुछ ही मिनटों में उपचार मुहैया हो गया। लोगों ने कहा कि काश अस्पताल की व्यवस्थाएं ऐसे ही चलती रहें।
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