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बैंड, बाजो ने बजाया ट्रैफिक का बैंड

Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
Firozabad
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फीरोजाबाद। देवोत्थान एकादशी पर शादियों की धूम रही। होटल, धर्मशालाएं, मैरिजहोम सभी हाउसफुल थे। अपराह्न चार बजे से बारातों के चढ़ाने का क्रम देर रात्रि तक चलता रहा। कुछ बारातें बिना बैंड के चढ़ीं। बैंडवाले निश्चित समय पर बैंड बजाकर वापस चले गए। हर किसी को पांच से छह तक शादियां अटेंड करनी पड़ीं। कहीं हाजिरी लगाई तो कहीं बच्चों को भेज दिया।
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जिन वर कन्याओं के गुण नहीं मिलते उनके विवाह देवोत्थान के दिन किए जाते हैं। शनिवार को सुहागनगरी में सुबह से ही बैंडबाजों की धुन सुनाई देने लगी थी। दूर दराज जाने वाली बारातों की निकासी शुरू हो गई थी। दूल्हे के परिजन नाचते, झूमते जा रहे थे। अपराह्न चार बजे से ही बारातों के चढ़ने का क्रम शुरू हो गया था। बैंडबाजे वालों के पास समय न होने के कारण वरमाला व अन्य कार्यक्रम देर से कर दिए थे। शहर में करीब एक सैकड़ा से अधिक होटल, धर्मशालाएं मैरिजहोम हाउस फुल थे। इसी के साथ ही गली एवं खाली प्लाटों में शामियाना लगाकर शादी की जा रही थी। किसी ने प्राइवेट स्कूल का सहारा लिया ता किसी ने अहाते आदि में दावत की। शादी की रस्में घरों पर संपन्न कराई गई। करीब 500 से अधिक विवाह संपन्न हुए।

तीन के बजाय दो घंटे बजा बैंड
बैंड कम और डिमांड अधिक होने के कारण फायदा बैंड संचालकों ने उठाया। उन्होंने एक बारात का समय तीन घंटे के बजाय दो घंटे कर दिया। चार से छह, छह से आठ, आठ से दस और दस से 12 बजे तक का समय रखा था। थोड़ा लेट हो जाने के कारण रात्रि को एक से डेढ़ बजे तक बारातें चढ़ती रहीं।
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घोड़ी वालों ने खूब कमाया
दूल्हे राजा घोड़ी पर सवार होकर ही आने चाहिए। इसका फायदा घोड़ी संचालकों ने उठाया। गांव देहात तक से घोड़ी पालकों को बुला लिया गया था। एक एक घोड़ी वाले ने आठ से दस हजार रुपया तक कमाया।

महंगी मिली फूलमाला
गुलाब की माला की डिमांड बढ़ गई। मालाएं 500 से एक हजार रुपया तक की मिलीं। 200 रुपया वाली माला में गेंदे के साथ अन्य फूलों को शामिल कर दिया। इसके साथ दुल्हन के लिए आने वाला फूलों का गजरा काफी महंगा रहा।

वेटरों की रही तलाश
शादियां अधिक और वेटर कम होने के कारण हलवाइयों को दिक्कत का सामना करना पड़ा। हालात यह थे कि बुजुर्गों को भी वेटर के रूप में लगा दिया। महत्वपूर्ण शादियों में तो शहर से बाहर और नेपाली लड़कियों तक को वेटर के रूप में लगाया गया था।

पुरोहितों ने उठाया फायदा
शादियों की धूम का फायदा पुरोहितों (पंडितों) ने उठाया। एक पंडित के पास इस दिन की पांच छह शादी बुक थीं। कई जिजमानों के शादी होने के कारण विकल्प के रूप में भी पुरोहितों को रखा। कइयों को शादी की किताब थमाकर भेज दिया।

सेठ, सेठानी की रही डिमांड
शादी समारोह में बच्चों के खेल के लिए सेठ सेठानी का प्रचलन काफी चला है। मिक्की माउस के साथ ही सेठ सेठानी की डिमांड काफी रही, लेकिन इनकी पूर्ति हर क्षेत्र में नहीं हो सकी।

फूल नहीं बैलून से सजावट
फूलों की सजावट महंगी होने के कारण कई शादियों में बैलून की सजावट दिखाई दी। रंग बिरंगे बैलून से स्वागत द्वार बनाने के साथ पांडाल में लगाए गए। यह बच्चों के लिए खिलौना भी बन गए।

पाकेटमार हुए सक्रिय
शादी समारोहों में पाकेट मार सक्रिय रहे। बारात चढ़ाने के दौरान नाचते- झूमते बारातियों में किसी का मोबाइल गायब हो गया तो किसी की चेन नहीं मिली।

जाम के झाम से जूझता रहा शहर
रंग- बिरंगी लाइटें, नाचते- झूमते बाराती और वाहनों का शोर होता रहा। एक बारात आगे तो दूसरी बारात उसके पीछे लगी थी। इस तरह का नजारा क्लब चौराहा, होटल गर्ग के समीप, सदर बाजार के साथ ही घंटाघर से अग्रवाल धर्मशाला की ओर जाने वाले रास्तों पर दिखाई दिया। बाजार में हर कोई जाम के झाम से परेशान दिखाई दिया। क्लब चौराहे पर देर शाम फोर्स मौजूद था, लेकिन बारात के जाम को कौन खुलवाता।
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