फिरोजाबाद। पांच साल पहले लागू एक्ट को ताक पर जिले में 750 से ज्यादा औद्योगिक इकाई, कोल्ड स्टोरेज, होटल-मैरिज और वाटर पार्क भूमि की कोख को खोखला कर रहे हैं। रोजाना लाखों लीटर भूगर्भ जल दोहन कर रहे इन औद्योगिक आस्थानों ने जिला प्रशासन द्वारा दो माह पूर्व जारी नोटिस भी ताक पर रख दिए हैं। वहीं भूगर्भ जल दोहित करने वालों पर लगाम कसने को बनाई कमेटी की गतिविधियां भी फिलहाल शून्य हैं।
भूगर्भ जल दोहन के जरिए कारोबारी गतिविधि वाली इकाइयों पर नियंत्रण को वर्ष 2019 में भूगर्भ जल संरक्षण एक्ट लागू किया गया। एक्ट में निहित प्रावधानों के मुताबिक भूगर्भ जल दोहन करने वाली इकाइयों को पीसीबी से मिलने वाली जल और वायु संरक्षण संबंधी अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के साथ ही उद्योग विभाग की एनओसी हासिल करने का प्रावधान है। एक्ट में निहित प्रावधानों के मुताबिक भूगर्भ जल दोहन करने वाली इकाइयों को संचालन शुरू होने के एक माह की अवधि में भूगर्भ जल संरक्षण विभाग से भी एनओसी हासिल करनी चाहिए। लेकिन जिम्मेदार विभागों के ढुलमुल रवैया के कारण अनाधिकृत रूप से प्रतिदिन लाखों लीटर भूगर्भ जल का दोहन कर रहीं जिले की 750 से अधिक इकाइयां लगाम नहीं कस पा रही है।
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पांच लाख जुर्माना व छह माह का कारावास
दिनों दिन रसातल में खिसक रहे भूगर्भ जल संरक्षण को बनाए एक्ट के मुताबिक बगैर एनओसी भूगर्भ जल दोहन करने वाली इकाइयों के विरुद्ध पांच लाख का जुर्माना एवं छह माह के कारावास का प्रावधान है।
जुलाई में जारी हुए, नोटिस, अनुपालन शून्य
जिला प्रशासन के निर्देश पर भूगर्भ जल संरक्षण विभाग द्वारा बीते जुलाई माह में करीब 100 से अधिक इकाइयों को नोटिस जारी किए गए। इन सभी को एक पखवाड़ा के भीतर भूगर्भ जल संरक्षण विभाग की एनओसी हासिल करने की हिदायत दी गई, लेकिन भूगर्भ जल संरक्षण विभाग के माध्यम से एनओसी हासिल करने वालों की संख्या शून्य है।
इन्हें एनओसी हासिल करना अनिवार्य-
कारोबारी संस्था संख्या
होटल मैरिज होम 130
कांच व चूड़ी पॉलिश/ धुलाई केंद्र 150
शीतग्रह / वाटर पार्क 180
छोटी, बड़ी क्लॉथ लॉन्ड्री 50
कांच घिसाई प्लांट व चायना पॉलिश प्लांट 80
निजी पानी प्लांट 200
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डीएम के निर्देश पर बनी कमेटी की गतिविधियां भी शून्य
जिलाधिकारी ने बीते माह उप जिलाधिकारी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। कमेटी को बगैर एनओसी भूगर्भ जल दोहन वाली इकाइयों का सर्वे व आवश्यक कार्रवाई को अधिकृत किया गया, लेकिन अभी कार्रवाई की प्रगति शून्य बताई गई।
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जिन संस्थाओं को नोटिस जारी हुए। उनमें से कुछ ने जवाब दिया है। जिन्होंने जवाब अथवा एनओसी हासिल करने का प्रयास नहीं किया। उन्हें अंतिम अवसर दिया जा रहा है। एनओसी हासिल नहीं करने पर एक्ट के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।
शत्रोहन वैश्य, मुख्य विकास अधिकारी
अतुल दीक्षित।