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नहरों में पानी कम, बंबा पडे हैं सूखे

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फिरोजाबाद। जिले की कृषि योग्य भूमि की सिंचाई के साधन सीमित होने के कारण कृषकों को सीमित कृषि उपज पर ही संतोष करना पड़ता है। विभिन्न हिस्सों में बहने वाली आधा दर्जन मौसम आधारित नदियां सूख गई हैं। वहीं ऊपरी एवं निचली गंगा नहर से जुड़ीं छोटी-बड़ी नहरों में सीमित पानी उपलब्ध होने के कारण कृषकों को निजी अथवा सरकारी नलकूप पर निर्भर हैं।
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जिले के करीब तीन लाख 70 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र की सिंचाई के लिए ऊपरी गंगा नगर, निचली गंगा नहर, हाथरस-इटावा ब्रांच एवं भोगनीपुर ब्रांच से जुड़ीं 49 नहरों, रजबहों को सिंचाई योग्य पानी मिलता है। लेकिन सीमित मात्रा में पानी मिलने की स्थिति में जिले के किसानों को सरकारी एवं निजी नलकूपों से सिंचाई योग्य पानी जुटाना पड़ता है। चूंकि जिले के छह ब्लाक डार्क जोन में शामिल होने के कारण इन ब्लाकों से जुडे़ गांवों में निजी नलकूप स्थापना का विकल्प फिलहाल बंद है। ऐसे में किसानों को जिले के विभिन्न ब्लाकों में नलकूप विभाग द्वारा स्थापित कुल 370 नलकूपों पर निर्भर रहना पड़ता है।

हाथरस रजबहा में भी कम दिखता है पानी
नारखी। गांव पचोखरा से लेकर फिरोजाबाद ब्लाक क्षेत्रांर्गत गांव नगला मुल्ला/फतेहपुर चकरपुर तक आने वाले रजबहा में कम ही पानी दिखता है। कभी टूंडला, नारखी व फिरोजाबाद ब्लाक के सैकड़ों ग्रामों को सिंचाई योग्य पानी देने वाला यह रजबहा अधिकांश समय सूखा रहता है। सिरसा, एका-हाथवंत में बहने वाली सैंगर के अतिरिक्त एका ब्लाक कृषि में बहने वाली अरिंद व ईशन नदियां भी समय के साथ सूखती जा रही हैं।
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सिंचाई विभाग के अनुसार फिलहाल ऊपरी व निचली गंगा नहर में पानी है। हाथरस ब्रांच से जुडे़ रजबहा में भी जल्द से जल्द पानी लाने के प्रयास होंगे। फिलहाल टूंडला, जसराना व हाथवंत ब्लाकों के तालाब व पोखरों को भरवाने योग्य पानी नदियों में उपलब्ध है।
जितेंद्र कुमार, एक्सईएन सिंचाई खंड

किसानों की बात-

रजबहा में कई साल से पानी नही मिल रहा है। सिंचाई विभाग की उदासीनता के कारण निजी नलकूप का सहारा लेकर खेतों की सिंचाई करनी पड़ती है।
पिंटू नारखी

खेतों की सिंचाई के लिए पानी चाहिए। सरकारी नलकूप से पर्याप्त पानी नहीं मिलता। इसके अलावा रजबहा एक साधन था उसमें भी पानी नहीं है।
लोकेंद्र शर्मा, मुहम्मदी


नहर में पानी कम आने से परेशान हैं किसान
जसराना। जसराना क्षेत्र में होकर इटावा ब्रांच एवं कानपुर ब्रांच नहर निकलती है। नहर से हजारों बीघा खेती की सिंचाई की जाती है। गेहूं की फसल की कटाई के बाद किसान अगली फसल की तैयारी कर रहे हैं। पटीकरा निवासी किसान रतन सिंह ने कहा कि नहर में पानी कम हो गया है। झपारा निवासी रनवीर सिंह ने कहा कि पटीकरा नहर में पानी कम होने के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। नगला मान निवासी अतर सिंह ने कहा कि पटीकरा नहर में पानी कम होने के कारण उससे निकलने वाले माइनरों में पानी नहीं आ रहा है। माइनरों में पानी न होने पर दिक्कत हो रही है।
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75 गांव के किसान करते हैं नहर के पानी से खेतों की सिंचाई
सिरसागंज। भांडरी से लेकर रामकुंआ, औरंगाबाद, नंदपुर, नगला धुरे, श्यामनगर, पटसुरी, तिलियानी, दरिगापुर आमौर, नगला केहरी, कौरारा, उजरई, नगला जीवन और नगला खंगर के कई ग्रामीण इलाकों के किसान जेड़ाझाल से निकल कर भोगनीपुर जाने वाली रामगंगा नहर के पानी से अपनी फसलों की सिंचाई करते हैं। आमौर निवासी सददी ने बताया कि यदि आमौर से होकर शिकोहाबाद स्टेशन जाने वाला मार्ग पूरा पक्का बन जाए तो किसानों को राहत मिल सकती है।
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