लापरवाही से परियोजना पर 50 प्रतिशत भी पूरा नहीं हुआ कार्य
करोड़ों रुपये की धनराशि खर्च होने के बावजूद आधी आबादी प्यासी रह गई। जलनिगम द्वारा दो साल पूर्व शुरू की गई 11 पेयजल परियोजनाओं पर कछुआ गति से कार्य चल रहा है। लापरवाही के कारण परियोजनाओं का 50 प्रतिशत भी कार्य पूर्ण नहीं हुआ।
जनपद की 25 लाख से अधिक आबादी के लिए पर्याप्त पानी का इंतजाम नहीं है। पेयजल संकट को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की जनता को पेयजल के लिए भटकना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल समस्या के निदान के लिए जलनिगम द्वारा वर्ष 2014-15 में 27.31 करोड़ की लागत से 11 परियोजनाएं शुरू की गई थीं। जलनिगम द्वारा कार्य तो प्रारंभ किया गया, परंतु कहीं पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं हो सका, तो कहीं नलकूप छिद्रण के बाद पर्याप्त पानी नहीं मिला। जहां नलकूप स्थापना का कार्य पूर्ण हो गया, वहां अवर जलाशय व सिविल कार्य पूर्ण नहीं हो सका। जलनिगम विभाग द्वारा इन परियोजनाओं पर दो साल में 16.32 करोड़ से अधिक धनराशि खर्च कर दी गई है, बावजूद अभी तक एक भी परियोजना चालू नहीं हो सकी। करोड़ों की धनराशि खर्च होने के बावजूद जनता को पानी नसीब नहीं हुआ।
कोटला परियोजना को बीत गए चार साल
जलनिगम द्वारा पेयजल परियोजनाओं व टीटीएसपी लगाने में हद दर्जे की लापरवाही की जा रही है। निगम द्वारा वर्ष 2011 में कोटला परियोजना शुरू की गई थी, जिस पर 68.65 लाख की धनराशि खर्च कर दी गई, बावजूद परियोजना की प्रगति मात्र 44 प्रतिशत हो सकी। यही नहीं 12.58 करोड़ की धनराशि से 166 स्थानों पर टीटीएसपी स्थापित कराई जानी थीं, उसमें से चार साल में एक भी टीटीएसपी चालू नहीं हो सकी। विभागीय सूत्रों का कहना है कि टीटीएसपी स्थापना कार्य पूर्ण हो गया है, विद्युत कनेक्शन होना शेष है।
एक नजर में योजनाओं की प्रगति
कमलापुर रखावली 58 प्रतिशत
ओढमपुर 17 प्रतिशत
नगला किरू 54 प्रतिशत
गुलामई 6 प्रतिशत
फतेहपुर कटैना प्रतिशत
नगला केशो 59 प्रतिशत
नगला सोना 58 प्रतिशत
दपामई शून्य
रानीपुरा 31 प्रतिशत
खेरिया सिकमी गोहाना 78 प्रतिशत