उधार ली गई रकम चुकता करने के लिए फर्जी चेक देने के मामले में अदालत ने डॉक्टर पर एक लाख 85 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
आरोपी डॉक्टर की तबीयत ठीक नहीं होने के कारण अदालत ने उनको कारावास की सजा नहीं सुनाई। सजा का आदेश एसीजेएम प्रमेंद्र कुमार ने वादी के अधिवक्ता जीतेंद्र कुमार शुक्ला की दलीलों को सुनने के बाद दिया।
शिवकुटी निवासी कृष्णकांत मालवीय ने अपने परिचित डॉक्टर कुंवर बहादुर सिंह को निजी जरूरतों के लिए 95 हजार रुपये उधार दिए थे। डॉक्टर ने वादा किया था कि रकम तीन माह में वापस कर देंगे। कृष्णकांत ने 16 मई 2006 और 18 तथा 24 मई को चेकों के माध्यम से रकम का भुगतान किया।
रकम वापस करने की तीन माह की समय सीमा बीतने पर जब उन्होंने डॉक्टर कुंवर बहादुर से रकम वापस मांगी तो देने में आनाकानी करने लगे। दोनों के बीच बातचीत बंद हो गई। रकम वापस नहीं मिलने के सदमे कृष्णकांत की पत्नी का निधन हो गया।
काफी प्रयास के बाद डा. कुंवर ने 30 नवंबर 2007 और 15 अक्टूबर 2007 को 50 हजार और 45 हजार रुपये के चेक कृष्णकांत को दिए मगर वह खाते में लगाने पर पर्याप्त रकम नहीं होने के कारण वापस हो गया।
डॉक्टर के आश्वासन पर चेक दोबारा भी खाते में लगाया गया मगर इस बार भी उसे भुनाया नहीं जा सका। कृष्णकांत ने डाक्टर को विधिक नोटिस दिया जिसका कोई उत्तर नहीं दिया गया।
उसने न्यायालय में परिवाद दाखिल कर दिया। दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद अदालत ने पाया डॉक्टर कुंवर बहादुर 138 एनआई एक्ट के तहत दोषी हैं। उन पर एक लाख 85 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है, जिसमें एक लाख 75 हजार रुपये कृष्णकांत मालवीय को दिए जाएंगे। दस हजार रुपये सरकार के खाते में जाएंगे।