फोटो-25- ग्राम प्रधान बहलौलपुर एलाई को स्वच्छता उत्पादों को देती समूह की महिलाएं। संवाद
फतेहपुर। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं स्वच्छता उत्पादों के निर्माण और आपूर्ति के जरिये आत्मनिर्भर बन रही हैं। जिले के सभी 13 विकासखंडों में महिलाएं हार्पिक, फिनाइल, डिटर्जेंट और हैंडवॉश जैसे दैनिक इस्तेमाल के उत्पाद तैयार कर रही हैं। इनकी आपूर्ति विभिन्न सरकारी विभागों, संस्थानों और ग्राम पंचायतों के सार्वजनिक शौचालयों में की जा रही है।
समूहों के माध्यम से महिलाएं उत्पाद निर्माण से लेकर पैकेजिंग, विपणन और आपूर्ति तक की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। ओम नम: शिवाय समूह की सुनीता देवी, माया और पूनम बताती हैं कि हार्पिक, फिनाइल, डिटर्जेंट और हैंडवॉश जैसे दैनिक उपयोग के उत्पाद तैयार कर सरकारी विभागों व ग्राम पंचायतों में बिक्री से उन्हें घर बैठे रोजगार मिला है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है।
जिला मिशन प्रबंधक शिवशांत मिश्रा ने बताया कि स्वच्छता उत्पादों की आपूर्ति के लिए सरकारी विभागों, संस्थानों और ग्राम पंचायतों से जुड़ाव स्वयं सहायता समूहों के कारोबार को आगे बढ़ाने का अवसर दे रहा है। सार्वजनिक शौचालयों और अन्य संस्थागत स्थलों पर इन उत्पादों के इस्तेमाल से स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने में भी मदद मिल रही है।
उपायुक्त अरुण कुमार ने बताया कि उप्र राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना और उनके उत्पादों को बाजार से जोड़ना है। जिले में स्वच्छता उत्पादों के निर्माण और आपूर्ति की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे महिलाओं में स्वरोजगार के प्रति रुचि बढ़ रही है।
फोटो-25- ग्राम प्रधान बहलौलपुर एलाई को स्वच्छता उत्पादों को देती समूह की महिलाएं। संवाद