अमौली। क्षेत्र में कई अवैध गन्ना क्रशर प्लांट संचालित हैं, जिनके पास न तो प्रदूषण नियंत्रण का प्रमाण पत्र है, न खाद्य विभाग की अनुमति और न ही मंडी समिति का लाइसेंस। इन प्लांट संचालकों द्वारा लाखों रुपये का टैक्स चोरी किया जाता है। कई संचालक गन्ने का भुगतान किए बिना भागने में सफल हो जाते हैं।
गन्ना पेराई के समय शुरू होते ही बिना पंजीकरण और लाइसेंस के गन्ने की पेराई और गुड़ बनाने का काम जोरों पर हो गया है। क्षेत्र में लगे प्लांटों का संचालन मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और हरिद्वार के लोग कर रहे हैं। गौरीपुर, मदरी, गांगपुर, बिजौली, सठिगवां, दरियापुर, कमाशी, मदियाखेड़ा, सैठी, धमना, जरैला पुर, बेहटी, बकियापुर, बाबूपुर सहित कई गांवों में प्लांट चालू हैं।
इनमें से किसी के पास प्रदूषण का अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं है। जहरीला धुआं निकलकर क्षेत्रवासियों के जीवन को प्रभावित कर रहा है। मंडी समिति का लाइसेंस न होने से बिना गेट पास गुड़ की आपूर्ति करके सरकारी राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। औसतन 55 क्रशर में प्रति दिन 20 क्विंटल के हिसाब से 1100 क्विंटल गुड़ बनता है। मंडी टैक्स डेढ़ प्रतिशत की दर से प्रतिदिन 66,000 रुपये का राजस्व चोरी होता है।
पिछले सत्र में नौ संचालक किसानों का भुगतान किए बिना भाग गए थे। इनमें से चार के खिलाफ जाफरगंज और चांदपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जो अभी विचाराधीन है।