अव्यवस्थाओं के बीच परिषदीय स्कूलों में सोमवार से वार्षिक परीक्षा शुरू हो गईं। कुल 2650 स्कूलों में पहले दिन पौने तीन लाख बच्चे परीक्षा में शामिल हुए। बेसिक शिक्षा विभाग से परीक्षा के लिए कोई बजट की व्यवस्था न होने के कारण गुरुजनों को अपनी पगार से उत्तर पुस्तिकाएं और प्रश्नपत्रों की व्यवस्था करनी पड़ी।
जिले में कुल 1903 प्राथमिक स्कूलों में 193327 बच्चे तथा 746 उच्च प्राथमिक स्कूलों में 82135 बच्चे पंजीकृत हैं। इन सभी सोमवार से वार्षिक परीक्षा शुरू हो गई।
पहली पाली में सुबह 10.30 बजे 12 बजे तक हिंदी तथा दूसरी पाली में 1.30 बजे 4 बजे तक संस्कृत विषय की परीक्षा हुई। बेसिक शिक्षा विभाग ने यह सबसे बड़ी परीक्षा संपन्न कराने के लिए सिर्फ आदेश जारी किया है।
शहर और कस्बों में सभी कक्षाओं के एक सेट प्रश्नपत्र हेडमास्टरों को उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों ने अपने स्तर से प्रश्नपत्र तैयार किए हैं।
शिक्षकों ने एक सेट प्रश्नपत्रों की छात्र संख्या के अनुरूप फोटोकापी कराई है। कक्षा एक से तीन तक बच्चों के प्रश्नपत्र में ही सवाल के जवाब लिखने पड़े हैं। ऐसी हालत में इन बच्चों को उत्तर पुस्तिका की जरूरत नहीं पड़ी, जबकि कक्षा 4 से लेकर कक्षा 8 तक के बच्चों के लिए शिक्षकों ने अपनी जेब से उतेतर पुस्तिकाएं भी खरीदी हैं।
शिक्षक दबी जुबान से कहते हैं कि इस परीक्षा में अपनी पगार से हजारों रुपये खर्च करना पड़ा है। ऐसी हालत में साफ है कि इस परीक्षा में जिले के गुरुजनों का लाखों रुपये खर्च हो रहा है।
परिषदीय स्कूलों में वार्षिक परीक्षा की उत्तर पुस्तिका और प्रश्नपत्रों में आने वाला खर्च विकास अभिदान फंड से भुगतान करने का प्रावधान है, लेकिन चालू सत्र में इस फंड में बेसिक शिक्षा विभाग ने किसी भी स्कूल को फूटी कौड़ी नहीं भेजी है। विकास अभिदान फंड प्रति प्राथमिक पांच हजार व प्रति उच्च प्राथमिक स्कूल साढे़ सात रुपये आवंटित होता रहा है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी त्रिपाठी का कहना है कि विभाग को विकास अभिदान फंड और स्कूलों की रंगाई पुताई का बजट करीब 3 करोड़ आ चुका है। स्कूलों को बजट बजट आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हर हालत में चालू माह के अंत तक सभी स्कूलों के बैंक खाते में धनराशि पहुंच जाएगी।