फतेहपुर। असिंचित क्षेत्र में सिंचाई के लिए लगाए गए 581 सरकारी ट्यूबवेलों में करीब 80 नलकूप ऐसे हैं, जो पिछले दो साल से बंद पड़े हैं।
इसकी वजह नलकूप की मोटरों को पानी न मिलना बताया जा रहा है। करीब 70 ट्यूबवेल ऐसे हैं, जो बारिश में जलस्तर बढ़ने से चालू हो गए थे, लेकिन अब फिर से जवाब देने लगे हैं।
जिले के आठ ब्लाक पहले से डार्कजोन घोषित हैं। यहां पर जलस्तर बढ़ाने का कोई कारगर प्रयास नहीं हुआ।
मनरेगा से तालाब, चेकडैम तो बनवाए गए, लेकिन वाटर रिचार्ज की व्यवस्था न होने की वजह से अब ये सूखे पड़े हैं। जल संरक्षण की सारी योजनाएं फेल हो गई।
नतीजा ये रहा है पिछले पांच साल में जलस्तर 40 से 50 फिट नीचे खिसक गया। पहले 75 से 80 फिट पर मोटर लगाकर नलकूप पर्याप्त क्षेत्र फल की सिंचाई करते थे, लेकिन अब वह पानी निकाल पाने की स्थित में नहीं हैं।
इस समय वही ट्यूबवेल पानी दे रहे हैं, जिनकी मोटरें 120 फिट से अधिक गहराई पर लगी हैं। दो साल से बंद पड़े 80 ट्यूबवेल ऐसे हैं, जिनमें 100 फिट से नीचे मोटर डालने की जगह ही नहीं है। ऐसे में इनमें पड़ी मोटरों को पानी नहीं मिल रहा है और यह शोपीस बने हुए हैं।
रिबोर ही है दूसरा विकल्प
जिन ट्यूबवेलों की बोरिंग में 100 फिट से नीचे मोटर डालने की जगह नहीं है। उनको चलाने के लिए रिबोर ही दूसरा विकल्प है, लेकिन डार्कजोन घोषित होने की वजह से आठ ब्लाकों में बोरिंग पर रोक लगी हुई है।
इस वजह से ट्यूबवेलों का संचालन नहीं हो पा रहा है। किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए निजी ट्यूबवेलों का सहारा लेना पड़ रहा है।
पर्याप्त बारिश न होने की वजह से जलस्तर नीचे गिर रहा है। हर साल 5-10 फिट पानी नीचे जा रहा है। पिछले पांच सालों में 50 फिट पानी नीचे जा चुका है।
ऐसे में पुराने नलकूप पानी छोड़ रहे हैं। जिन नलकूपों के बोरिंग की हाउजिंग 125-130 फिट में है, उनमें पाइप जोड़कर मोटर नीचे डालकर चलाने का प्रयास किया जाता है। डार्कजोन की स्थित में रिबोर भी नहीं कराया जा सकता है। - किशन लाल, अधिशाषी अभियंता नलकूप