फतेहपुर। रोडवेज बसों के टोल टैक्स में 15 से 30 रुपये तक की कटौती के बावजूद परिवहन निगम अब भी यात्रियों से पुराना किराया ही वसूल रहा है। यात्रियों को भले ही किराये में कमी न मिल रही हो, लेकिन परिवहन निगम को रोजाना चार से पांच लाख की बचत हो रही है। जिम्मेदारों का कहना है कि मुख्यालय से आदेश मिलने के बाद ही किराये में कमी की जाएगी। वहीं, पिछले साल टोल बढ़ने के अगले ही दिन रोडवेज ने किराया बढ़ा दिया था।
जिले में कानपुर व प्रयागराज के लिए हर दिन 125 बसों का आवागमन होता है। औसतन 45 सवारी के हिसाब से प्रतिदिन 17 लाख से ज्यादा की कमाई होती है। बड़ौरी टोल प्लाजा में कानपुर रूट पर बसों से पहले फास्ट टैग से टोल 435 लिया जाता था जो अब 420 रुपये हो गया है। इसके बाद भी पहले की तरह प्रति यात्री से 136 रुपये किराया वसूला जा रहा है। इससे रोडवेज को टोल से प्रतिदिन करीब दो लाख की बचत हो रही है।
इसी तरह प्रयागराज रूट पर खागा टोल से 335 के स्थान पर 325 रुपये लिए जा रहे है। यात्रियों से पुराना किराया 179 रुपये ही वसूला जा रहा है। इससे करीब ढाई लाख रुपये की बचत निगम को हो रही है। टोल टैक्स में छूट के बावजूद यात्रियों को कोई रियायत नहीं दी गई है।
टोल बढ़ने के अगले दिन ही पांच रुपये बढ़ा दिया था किराया
जिले के नेशनल हाईवे पर एक साल पहले करीब 15 से 20 रुपये टोल टैक्स को बढ़ाया गया था। इसके अगले ही दिन रोडवेज बसों में पांच रुपये किराया बढ़ा दिया गया। टोल कम होने के दो सप्ताह बाद भी किराये में किसी भी प्रकार कटौती नहीं की गई है।
स्थानीय यात्री रवि शुक्ला ने बताया कि अगर टोल कम हुआ है तो इसका लाभ यात्रियों को मिलना चाहिए। रोजाना हजारों लोग सफर करते हैं, और लाखों रुपये का फायदा केवल विभाग को देना गलत है। बड़े टोल का हवाला देकर कई बार किराया बढ़ा दिया जाता है। अब टोल कम हुआ तो किराया कम क्यों नहीं हो रहा है।
ज्वालागंज निवासी आकाश सिंह ने बताया कि टोल प्लाजा से बचत के रुपये में परिवहन निगम कमाई कर रहा है, लेकिन यात्रियों के बोझ का बोझ कम नहीं हो रहा है। बीते दिनों टोल कम होने की जानकारी हुई थी, तो लगा किराया भी कम होगा, लेकिन रोडवेज बसों में अभी भी किराया पुराने हिसाब से ही लिया जा रहा है।
रोडवेज अधिकारी हो या रोडवेज के कर्मचारी संगठन, कोई भी टोल टैक्स कम होने के बाद भीययात्री किराया कम होने पर स्पष्ट कुछ बोलने को तैयार नहीं है। माना जा रहा है कि रोजाना की चार से पांच लाख की आमदनी बढ़ रही है, इससे जिम्मेदारों पर काम का बोझ कम होगा और निगम की आमदनी का ग्राफ भी बढ़ेगा।
बसों में किराया घटाने के लिए एमडी स्तर से कोई निर्देश नहीं आया है। जैसे ही आदेश प्राप्त होगा, संशोधन किया जाएगा।
-एसपी सिंह, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम)