यमुना तिरहार की हजारों बीघा जमीन सूखे की चपेट से
बंजर हो गई है। पर्याप्त बारिश न होने से खेत की मिट्टी की नमी खत्म हो गई
है। तिरहार क्षेत्र में प्रकृति की बारिश के अलावा दूसरा कोई फसल सिंचाई का
विकल्प भी नहीं है। ऐसे में कृषि विभाग से मिलने वाला बीज भी किसानों के
लिए बेमकसद है। अन्नदाता भी खेती से मुंह मोड़कर गांव से पलायन करने को
मजबूर हैं।
तिरहार की श्रेणी में आने वाली करीब 80 हजार हेक्टेयर भूमि
पर्याप्त बारिश न होने से बंजर हो गई है। सूखे की वजह से मिट्टी पत्थर के
समान हो गई है। खेत की जोताई करना भी किसानों के लिए मुश्किल है। जहानाबाद
से लेकर धाता क्षेत्र के यमुना तिरहार तक के सैकड़ों गांव के किसान खेतों
में फसल की बुआई नहीं कर पा रहे हैं।
जिन किसानों ने बारिश की आस लगाकर
जैसे तैसे फसल की बुआई कर दी थी, वह सूख गई है। क्षेत्र का किसान परिवार
मजदूरी कर पेट तो भर ले रहा है, लेकिन मवेशियों का पेट भरने के लिए लोगों
को चारा नहीं मिल रहा है। खेतों में फसल के साथ उगी हुई घास भी सूख गई है।
सूखा से प्रभावित यमुना क्षेत्र के परसेढ़ा,
दपसौरा, मवई, रिठवां, अवाजीपुर, चांदपुर, बारा, ककोरा, जमरौली, कुकेड़ा,
गजईपुर, सैंबसी, मौहारी, दरियाबाद, अढौली, दामपुर, बहादुरपुर, कोंड़ार,
महना, उरौली, दतौली, ललौली, कोर्रा, कनक, मझगवां, किशनपुर, चंदापुर, धाना,
गिरधरपुर, गंज, संगोलीपुर, मडै़यन, कोट, गढ़ा समेत अन्य गांव हैं।
सरकार ने यमुना क्षेत्र से 16 किमी तक बुंदेलखंड की श्रेणी में रखा है,
लेकिन पूरे जिले के किसानों को मिलने वाली योजनों में कोई फर्क नहीं होता
है। उपकृषि निदेशक कार्यालय से मिलने वाले कृषि बीज व कृषि यंत्रों की खरीद
में 75 फीसदी तक अनुदान दिया जाता है, जबकि बुंदेलखंड के किसानों को 90
फीसदी तक कृषि योजनाओं में लाभ दिया जाता है।
बहुआ क्षेत्र के कोर्रा,
दतौली, सतखरा, महना, जमेही, मुत्तौर, ललौली, अढ़ौली, उरौली, दशहरी यमुना
तिरहार के गांव में सूखा, ओलावृष्टि का मुआवजा किसानों को नहीं मिला है। जिला
कृषि अधिकारी रविकांत सिंहने बताया कि यमुना तिरहार के किसानों में साढ़े
तीन हजार क्विंटल गेहूं और साढ़े चार सौ क्विंटल चना का बीज में किसानों को
अनुदान का लाभ दिया गया है। प्रकृति की मार से फसलों की पैदावार में
किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है।’