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ढाई हजार से ज्यादा बच्चे नहीं जाते स्कूल

Tue, 01 Sep 2015 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
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जिले में 2837 विकलांग बच्चे अनिवार्य शिक्षा अधिनियम से वंचित हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के पास सिर्फ 720 विकलांग बच्चों के पढ़ाने की व्यवस्था है, जबकि जिले में कुल विकलांग बच्चों की संख्या 3557 है।
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बेसिक शिक्षा विभाग हर साल जिले में 6 से 14 वर्ष के विकलांग बच्चों का सर्वे कराती है। इसी सर्वे के आधार में जिलेभर में कुल विकलांग बच्चों की संख्या 3557 है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक स्कूलों में इन बच्चों का पंजीयन कराकर पढ़ाने के लिए 38 टीचरों की संविदा पर नियुक्ति है। इन टीचरों का काम 6 से 8 परिषदीय स्कूल में जाकर 20 बच्चों का पढ़ाना है। चालू सत्र में बेसिक शिक्षा विभाग ने पुरानी तहसील के पास महात्मा गांधी जूनियर हाईस्कूल में 120 विकलांग बच्चों को पढ़ाने के लिए कैंप संचालित किया है। इसमें रहने, खाने की बच्चों के लिए पूरी व्यवस्था है। इस कैंप में पढ़ाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में पढ़ाने के लिए नियुक्त 8  टीचर कैंप में संबद्ध कर लिए हैं। ऐसी हालत में ग्रामीण क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों में विकलांग बच्चों को पढ़ाने के लिए विभाग के पास सिर्फ 30 शिक्षक बचे हैं। 12 हजार रुपये मासिक मानदेय पर नियुक्त यह तीस शिक्षक प्रतिदिन 600 बच्चों को ही पढ़ाते हैं। सर्व शिक्षा के जिला समन्वयक अरुण कुमार मिश्रा ने बताया
कि जिले में 120 बच्चों को कैंप में रखकर पढ़ाने की व्यवस्था की गई है। ग्रामीण क्षेत्र में तैनात 30 इंटीनरेंट टीचर प्रतिदिन 6 से 8 स्कूलों में जाकर प्रत्येक शिक्षक को 20 बच्चे पढ़ाने का लक्ष्य है। इस तरह से कुल 600 बच्चों को ही यह शिक्षक पढ़ा रहे हैं। अभी बड़ी तादाद में विकलांग बच्चे पठन पाठन व्यवस्था से वंचित हो रहे हैं।
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