फतेहपुर। यार्ड में पत्रकार की नृशंस तरीके से हत्या करने वाला और कोई नहीं उसका पुराना करीबी दोस्त है। वारदात से लोग दहले नजर आए। घटना ने समाज में किसी भी करीबी पर भरोसा न करने का संदेश दिया है। लोगों में चर्चा रही कि गेट खुलवाने के लिए हत्यारोपी आलोक ने फोन पर गिले शिकवे दूर करने आने का झांसा दिया था।
पत्रकार दिलीप सैनी की हत्या के बाद सभी की जुबान पर एक ही शब्द रहा कि किसी करीबी पर भरोसे का समय नहीं रहा है। वह दोनों दोस्त की तरह रहते थे। अक्सर वे लोग यार्ड में एक साथ बैठकर खाना बनवाते और खाते थे। यहां तक एक-दूसरे की हर परिस्थिति पर काम आते थे। नर्सिंग होम में हुए विवाद के बाद पुलिस से शिकवा-शिकायत ने दोस्ती में दरार डाल दी। बताया जाता है कि हमलावर घटना के समय नशे में थे। वह नर्सिंग होम में नशे में पहुंचे थे। हालांकि दिलीप विवाद को बढ़ाना नहीं चाहते थे, इसी वजह से समझौता भी कराया था। यही बात हत्याकांड की वजह बन गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ होता है कि हमलावर दिलीप को जिंदा नहीं छोड़ना चाहते थे। उसके सिर व शरीर पर धारदार हथियार की आठ चोट के निशान मिले हैं। सीने में घाव आरपार दिखा है। घाव नुकीले सरिया का मालूम हुआ है। हाईवे पर शव रोक जाम के दौरान छोटा भाई संदीप बोला कि खंजर भोंकने वालों का एनकाउंटर हो। वहीं पत्नी, मां व पिता दहाड़ मारकर रोते बिलखते दिखे। पत्रकार के आवास पर सपा सांसद नरेश उत्तम व सदर विधायक चंद्रपाल लोधी पहुंचे। उन्होंने परिवार को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। पोस्टमार्टम हाउस से लेकर भिटौरा धाम तक भारी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।
पक्का तालाब, मसवानी में ताबड़तोड़ दबिश
एसपी ने हत्यारोपियों की तलाश में तीन टीमें गठित की हैं। कई आरोपी पक्का तालाब व मसवानी मोहल्ले के रहने वाले हैं। इसी वजह से आरोपियों की तलाश में पुलिस पक्का तालाब और मसवानी मोहल्ले को छावनी बनाए रही। आरोपियों के कई परिजनों को भी पुलिस ने उठाया है।
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पुलिस को दी सूचना, पहुंचने से पहले हो गई घटना
आरोपी पक्ष के यार्ड पहुंचने पर पत्रकार को हमले की आशंका हुई। उसने आशंका पर कोतवाल को फोन पर सूचना दी। बताया जा रहा है कि कोतवाल ने किसी एसआई को मौके पर भेजा साथ ही दिलीप से गेट नहीं खोलने के लिए कहा। पुलिस के पहुंचने से पहले बहकावे में पत्रकार ने गेट खोल दिया।
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त्योहार पर उजड़ीं खुशियां, मौत खींचकर ले गई थी
पत्रकार दिलीप की पत्नी मनोरमा लखनऊ में थीं। दिलीप लखनऊ जाने के लिए बुधवार शाम निकले थे। इसी दौरान नर्सिंग होम संचालक प्रकाश का फोन पहुंचा और उसने विवाद की सूचना दी। संचालक के फोन पर दिलीप वापस हो गए। विवाद के बाद उनकी हत्या कर दी गई। त्योहार पर हुई घटना से परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। दिलीप की एक आठ साल की बेटी और पांच साल का बेटा है।
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पक्का तालाब इलाके में अक्कू की बोलती तूती
पक्का तालाब इलाके में अक्कू तिवारी तूती बोलती रही है। उसका कई साल से एक टेंपो स्टैंड चलता है। बुलेट बाइक से घूमता है। मामूली बातों पर अक्सर लोगों के साथ मारपीट, बमबाजी व गोलीबारी करता है। उसके बेखौफ अंदाज को देखकर कुछ सफेदपोशों ने उसे संरक्षण दिया। संरक्षण के बाद वह जमीनों पर कब्जे और जुआ जैसे अपराधों में संलिप्त हो गया। आरोपियों में शामिल जांटी भी शातिर किस्म का है। उस पर भी कई मुकदमे दर्ज हैं। इस हत्याकांड के पीछे भूमि विवाद का भी मामला बताया जा रहा है। इसी वजह से आरोपियों में लेखपाल सुनील राणा को भी शामिल किया गया है।
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हत्या के बाद जीजा व खागा में रिश्तेदार को फोन किया
हत्या के बाद यार्ड से ही अक्कू सबसे पहला फोन गढ़ीवा मोहल्ले के रहने वाले सेवानिवृत्त फौजी बहनोई राजेश द्विवेदी को किया था। इसके बाद खागा में रिश्तेदार को फोन किया था। पुलिस बहनोई से पूछताछ करने पहुंची। उसके बाद पुलिस खागा रवाना हुई।