सठिगवां के गया प्रसाद विश्वकर्मा भले ही जीवित हों लेकिन सरकारी अभिलेखों में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। कर्मचारियों की लापरवाही से हुई चूक का का खामियाजा पीड़ित को भुगतना पड़ रहा
मृत घोषित होने पर गया प्रसाद की वृद्धावस्था पेंशन भी रोक दी गई है। ऐसे में वह आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
सोमवार को समाज कल्याण अधिकारी कार्यालय में सठिगवां के पूर्व प्रधान समाज कल्याण अधिकारी से मिलकर उनको इस मामले की जानकारी दी।
पूर्व प्रधान ने बताया कि उनके गांव के रहने वाले गया प्रसाद विश्वकर्मा बहुत गरीब और वृद्ध हैं। शासन की योजना के अंतर्गत गया प्रसाद को 21 अप्रैल 2007 से वृद्धावस्था पेंशन मिलनी शुरू हुई और वर्ष 2013 तक मिली। इसके बाद प्रशासन ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जब वृद्धावस्था पेंशन मिलनी बंद हो गई तो पीड़ित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक पहुंचे। जहां से उन्हें खुद को मृत घोषित कर देने की जानकारी मिली। समाज कल्याण अधिकारी को मामले की पूरी जानकारी दे दी। समाज कल्याण अधिकारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।