जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस पर दंपति की मौत के बाद रामप्यारी के मायके से आए लोगों ने जबरदस्त हंगामा किया। यही नहीं मायके वालों ने ससुरालीजनों से बदसूलकी की। दोनों पक्षों में टकराव की नौबत देखकर पुलिस ने लाठी पटक कर हंगामा कर रहे लोगों को खदेड़ा।
बता दें कि मंगलवार दोपहर रामप्यारी के मौत की खबर सुनकर मायके पक्ष से भाई सूरजपाल समेत डेढ़ दर्जन लोग पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। शव देखने के बाद हंगामा शुरू कर दिया। मनीराम के वृद्ध पिता हीरालाल और मां बसंती देवी से गालीगलौज करने लगे। सूरजपाल ने आरोप लगाया कि उसकी बहन को आग लगाकर मार डाला गया है।
परिवार व गांव के लोगाें ने विरोध किया। दोनों पक्षों में तकरार शुरू हो गई। पंचनामा भरने पहुंचे जेल चौकी इंचार्ज नागेंद्र चौबे ने समझाने बुझाने की कोशिश की, जब वह लोग नहीं माने तो पुलिस को डंडा लेकर खदेड़ना पड़ा। जिसके बाद मायके पक्ष के लोग वापस चले गए। तब दोनों शवों का पंचनामा भरा गया।
दो मासूम हो गए अनाथ- इस घटना से दो मासूम बच्चे अनाथ हो गये हैं, उनसे मां और पिता दोनों का ही साया छिन गया है। मनीराम को एक बेटी लक्ष्मी (छह) और बेटा शुभम (दो) हैं। ग्रामीणों में बच्चों को देखकर यही सवाल रहा है कि अब उनकी कौन देखभाल करेगा?
चारों भाइयों का अलग-अलग रहता परिवार- हीरालाल के चार बेटों में मनीराम का परिवार तबाह हो गया है। हीरालाल ने बताया कि उसके पास आठ बीघा खेत हैं, उसके चार बेटे जागेश्वर, सूरज, मनीराम और छोटू हैं। सभी बेटे शादीशुदा है। चारों बेटे गांव में अलग-अलग रहते हैं। यह सभी मजदूरी कर परिवारों क ा जीवनयापन करते हैं।
...तो पत्नी की मौत के बाद दहशत में दी जान= मनीराम पत्नी की मौत के बाद खामोश हो गया था, उसको जबरदस्त सदमा लगा था, उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करे। किसी तरह से अपने वार्ड में पहुंचा। वहां पर पत्नी की मौत के गम चीखने चिल्लाने लगा था। लोगों का कहना है कि उसको शायद यह डर सताने लगाने लगा कि अब उसको परिवार समेत जेल जाना पड़ेगा। इस बात की दहशत में ही उसने अपनी ही जान दे दी।
दोनों की मौत के बीच रहा दो घंटे का फासला- महिला वार्ड में भर्ती रामप्यारी की मौत भोर पहर हो गई थी। रामप्यारी के पास उसकी सास बसंती देवी रही है। वहीं पुरुष वार्ड में भर्ती पति मनीराम के पास उसका पिता हीरालाल मौजूद था। बहू की मौत के दो घंटे तक शव के पास रामप्यारी रोती बिलखती रही, उसने पुरुष वार्ड जाकर बेटे को बहू की सांस थमने की खबर दी।
हालांकि अस्पताल प्रशासन ने दोनों की मौत आधे घंटे के भीतर ही दिखाई हैं। अस्पताल रिकार्ड के मुताबिक छह बजकर 50 मिनट में रामप्यारी की मौत हुई, उसके बाद सात बजकर 20 मिनट में मनीराम ने फांसी लगाई है। चर्चा यह है कि मनीराम की मौत की खबर सात बजे नर्स इंजेक्शन लगाने पहुंची तब हो सकी है।
सूने घर में भी लगा रहा तांता- बकेवर। शकूराबाद गांव में मनीराम और उसकी पत्नी रामप्यारी की मौत की खबर सुबह पूरे गांव में फैल गई थी। दंपति परिवार के सभी सदस्य पोस्टमार्टम हाउस आ गए थे। गांव में घर पर कोई मौजूद नहीं रहा। इसके बाद भी ग्रामीण महिलाएं और पुरुष पहुंचते रहे। ग्रामीणों ने बताया कि वह अंतिम संस्कार में जाने के लिए शवों के आने का इंतजार कर रहे हैं। कुछ रिश्तेदार भी दूरदराज से पहुंचे रहे हैं।