खखरेरू। विजयीपुर के सतगुरु क्लीनिक में उपचार के बाद चार वर्षीय बच्ची अशी की हालत बिगड़ गई। गंभीर स्थिति में उसे लखनऊ पीजीआई ले जाया गया। यहां बृहस्पतिवार सुबह करीब छह बजे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजन ने क्लीनिक में उपचार के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की है।
बच्ची अशी के पिता सर्वेश कुमार और मां मनीषा देवी ने बताया कि 25 अगस्त को बेटी को बुखार आया था। उसे सतगुरु क्लीनिक ले गए, जहां डॉक्टर ने कमर में इंजेक्शन लगाया। इसके बाद कमर में सूजन हो गई और कुछ दिन बाद फोड़ा बन गया। नौ सितंबर को डॉ. बृजेश कुमार ने फोड़े का ऑपरेशन किया, लेकिन बच्ची की हालत में सुधार नहीं हुआ। गंभीर स्थिति में उसे हरदोई ले जाया गया।
वहां से फतेहपुर सदर अस्पताल और फिर हैलट अस्पताल कानपुर रेफर किया गया। कानपुर के डॉक्टर ने लखनऊ पीजीआई भेज दिया। परिजन ने बताया कि वहां डॉक्टर ने संक्रमण पूरे शरीर में फैलने की बात बताई। उपचार के दौरान बच्ची ने दम तोड़ दिया।
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तीन बहनों में सबसे बड़ी थी अशी
अशी तीन बहनों में सबसे बड़ी थी। उसकी ढाई वर्षीय बहन मानसी और सात माह की प्रिया हैं। बच्ची की मौत से परिवार में मातम है। माता-पिता का आरोप है कि क्लीनिक में उपचार के दौरान बरती गई लापरवाही से बेटी की जान गई।
पहले सील हो चुका है सतगुरु क्लीनिक
सतगुरु क्लीनिक में 10 दिसंबर 2024 को सोनेमऊ निवासी सुदर्शन के पुत्र जयकरण (29) की इलाज के दौरान मौत हुई थी। बुखार आने पर भर्ती जयकरण को रात में क्लीनिक के वार्ड बॉय ने इंजेक्शन लगाया था। इसके कुछ देर बाद उसकी हालत बिगड़ी और मुंह से खून निकलने लगा। थोड़ी देर बाद उसकी मौत हो गई। परिजनों ने गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाकर हंगामा किया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्लीनिक सील कर दिया था। अब अशी की मौत के बाद सवाल उठ रहा है कि सील होने के बावजूद क्लीनिक दोबारा कैसे संचालित होने लगा। सील किसके आदेश से खोली गई और उससे पहले पंजीकरण व अन्य दस्तावेजों की जांच हुई या नहीं, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा।
क्लीनिक बंदकर चला गया डॉक्टर
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्लीनिक पर संचालन या पंजीकरण संबंधी जानकारी अंकित नहीं थी। अशी की मौत की जानकारी मिलने के बाद डॉक्टर क्लीनिक बंदकर चला गया। इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।
जन्मदिन पर घर लौटने की आस लगाए रही अशी
सर्वेश ने बताया कि बृहस्पतिवार को अशी का जन्मदिन था। अस्पताल में वह बार-बार पापा से पूछती थी कि उसका जन्मदिन नहीं मनाएंगे और उसे घर कब ले जाएंगे। वह केक काटने की बात कहती रही। जन्मदिन पर घर लौटने की उसकी आस पूरी नहीं हो सकी।
गलत इंजेक्शन लगाने से बच्ची की मौत की शिकायत पर विजयीपुर एमओआईसी से जांच कर 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी गई है। एमओआईसी ने बताया कि क्लीनिक पहले सील हुआ था, इसकी जानकारी नहीं है। कार्रवाई करीब तीन साल पुरानी बताई जा रही है।
- डॉ. यूबी सिंह, सीएमओ।
फाइल फोटो-48-अशी। स्रोत परिजन
फाइल फोटो-48-अशी। स्रोत परिजन
फाइल फोटो-48-अशी। स्रोत परिजन